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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 10, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Skanda Sashti 2024: जुलाई में कब है स्कंद षष्ठी? अभी नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    Updated: Wed, 10 Jul 2024 10:00 AM (IST)

    स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं। यदि आप भी भगवान ...और पढ़ें

    Skanda Sashti 2024: जुलाई में कब है स्कंद षष्ठी? अभी नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
    Skanda Sashti 2024: जुलाई में कब है स्कंद षष्ठी? अभी नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    HighLights

    1. शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि भगवान कार्तिकेय जी को समर्पित है।
    2. इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा होती है।
    3. इस बार स्कंद षष्ठी 11 जुलाई को है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Skanda Sashti 2024: प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कार्तिकेय की उपासना करने से शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है।

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    स्कंद षष्ठी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त (Skanda Sashti 2024 Date and Shubh Muhurat)

    पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि तिथि की शुरुआत 11 जुलाई को सुबह 10 बजकर 03 मिनट से होगी। वहीं, इसका समापन 12 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर होगा। ऐसे में स्कंद षष्ठी 11 जुलाई को मनाई जाएगी।

    स्कंद षष्ठी पूजा विधि (Skanda Sashti Puja Vidhi)

    स्कंद षष्ठी के दिन सुबह उठें और गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। इसके बाद वस्त्र धारण कर सूर्य देव को जल अर्पित करें। अगर विशेष कार्य में सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, तो व्रत रख सकते हैं। अब पंचोपचार एवं षोडशोपचार कर भगवान कार्तिकेय की पूजा करें। इसके लिए चौकी पर कपड़ा बिछाकर कार्तिकेय की प्रतिमा विराजमान करें। अब फल, फूल, दूध, दही, श्रीखंड, घी, अक्षत, धूप, दीप, हल्दी समेत आदि चीजें अर्पित करें। प्रभु की आरती कर कार्तिकेय चालीसा का पाठ और मंत्रों का जप करें। अंत में फल, खीर और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।

    इन मंत्रों का करें जप

    • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात:
    • देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव। कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥
    • ॐ शारवाना-भावाया नम: ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नामोस्तुते।

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