3 साल बाद बना खास संयोग, सोमवती अमावस्या पर पितरों के लिए क्या करें?
15 जून 2026 को अधिकमास की सोमवती अमावस्या है। जानिए पितरों की कृपा पाने, सुख-समृद्धि बढ़ाने और जीवन की परेशानियां दूर करने के लिए किए जाने वाले आसान उ ...और पढ़ें

सोमवती अमावस्या पर क्या करें क्या नहीं? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि को पितरों का आशीर्वाद पाने क सबसे विशेष अवसर माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसका नाम सोमवती अमावस्या पड़ जाता है। साल 2026 में अधिकमास के दौरान 15 जून को यह शुभ संयोग बन रहा है। इसी कारण इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। चलिए जानते हैं इस दिन आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए दान-पुण्य और सेवा कार्यों से पितरों की कृपा मिलती है। माना जाता है कि पितरों का आशीर्वाद मिलने पर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
जरूरतमंदों को भोजन कराएं
हिंदू धर्म में अन्नदान यानी अनाज के दान को सबसे श्रेष्ठ दानों में से एक माना गया है। अगर सोमवती अमावस्या के दिन किसी भूखे व्यक्ति, साधु-संत, गरीब परिवार या जरूरतमंद को अन्न का दान कराया जाए या फिर भोजन कराया जाए, तो इसे बेहद पुण्यदायी माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, राशन या अनाज का दान कर सकते हैं।
जूते-चप्पल का दान
तपती गर्मी और बरसात के मौसम में कई लोग बुनियादी जरूरतों से वंचित रह जाते हैं। कुछ लोगों के पास इस धूप में नंगे पैर चलने की जगह कोई चारा नहीं होता। ऐसे में किसी गरीब व्यक्ति, वृद्ध, मजदूर या अनाथ बच्चे को जूते-चप्पल भेंट करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस तरह के दान करने से पितरों को खुशी मिलती है और वह आप पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं। साथ ही, यह दान जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक हो सकता है।
काले तिल से करें तर्पण
अमावस्या के दिन काले तिल का विशेष महत्व माना गया है। सुबह स्नान के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण किया जा सकता है। साथ ही, तिल का दान भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।
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दीपदान का महत्व
सोमवती अमावस्या पर दीपदान करना भी बहुत शुभ माना गया है। मंदिर, नदी के किनारे या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपदान अंधकार को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करता है और पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम भी माना जाता है।

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तुलसी चालीसा का पाठ
सोमवती अमावस्या पर तुलसी चालीसा का पाठ परम कल्याणकारी माना गया है। मान्यता है कि अगर आप इस दिन ये पाठ करते हैं तो आपके जीवन में कई तरह के बदलाव होते हैं और पितरों का भी आशीर्वाद मिलता है।
''श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।''
नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।
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