Sunderkand Path: कब और कैसे करें सुंदरकांड का पाठ? जान लें सही विधि, भूलकर भी न करें ये गलतियां
धार्मिक मान्यतानुसार, सुंदरकांड का विधिपूर्वक पाठ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और हनुमान जी की कृपा मिलती है। ...और पढ़ें

सुंदरकांड पाठ के नियम (Image Source: AI-Generated)
HighLights
विधिपूर्वक सुंदरकांड पाठ से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं
मंगलवार और शनिवार सुंदरकांड पाठ के लिए शुभ दिन हैं
पाठ के दौरान काले वस्त्र न पहनें, वाद-विवाद से बचें
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधिपूर्वक सुंदरकांड का पाठ करने से साधक के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। अगर आप भी सुंदरकांड का पाठ करने जा रहे हैं, तो आइए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि सुंदरकांड पाठ के नियम (Sunderkand Path Ke Niyam) और विधि के बारे में।
सुंदरकांड पाठ विधि (Sunderkand Path Vidhi)
सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और हनुमान जी की प्रतिमा को विराजमान करें।
दीपक जलाएं और अक्षत लेकर पाठ का संकल्प लें।
गणेश पूजन कर हनुमान जी को रोली, चावल, पुष्प, धूप, दीप समेत आदि चीजें अर्पित करें।
इसके बाद सुंदरकांड पाठ का करें।
इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।
हनुमान जी और राम जी की आरती करें।
बेसन के लड्डू और बूंदी समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।
आखिरी में लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
सुंदरकांड का पाठ कब करें?
अगर आप सुंदरकांड का पाठ करना चाहते हैं, तो इसके लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता है। यह दोनों दिन हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना अधिक फलदायी साबित होता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- सुंदरकांड के पाठ के दौरान बीच में न रुके और पाठ को बीच में अधूरा न छोड़ें
- इस दौरान किसी से वाद-विवाद न करें।
- काले रंग के कपड़े धारण न करें।
- किसे के बारे में गलत न सोचें।
- सुंदरकांड पाठ के दिन तामसिक भोजन से बचें।
- इस दौरान अपना ध्यान हनुमान जी के चरणों में रखें।
मिलते हैं ये लाभ
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में आ रहे सभी संकट दूर होते हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
- इसके अलावा तनाव और भय की समस्या से छुटकारा मिलता है।
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- राहु-केतु और मंगल जैसे ग्रहों के बुरा प्रभाव दूर होता है।
- बिगड़े काम पूरे होते हैं।
- कलह-कलेश दूर होता है।
- घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- धन लाभ के योग बनते हैं।
- परिवार के सदस्यों के रिश्ते मजबूत होते हैं।
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