यहां भक्त की पुकार पर प्रकट हुई थीं मां भगवती, बिहार-यूपी और नेपाल से आते हैं श्रद्धालु
गोपालगंज के थावे में स्थित 300 साल पुराना मां दुर्गा मंदिर एक जागृत शक्तिपीठ है। यहां भक्त रहषु की पुकार पर मां भगवती प्रकट हुई थीं। नवरात्र में बिहार ...और पढ़ें

थावे स्थित माता रानी का मंदिर। जागरण

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जागरण संवाददाता, गोपालगंज। गोपालगंज जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर सिवान-गोपालगंज मुख्य मार्ग पर थावे में मां दुर्गा का मंदिर स्थित है। करीब तीन सौ साल पूर्व स्थापित यह जाग्रत प्राचीन शक्ति पीठ में से एक है। प्रति वर्ष नवरात्र के समय यहां बिहार ही नहीं सीमावर्ती यूपी व नेपाल के भक्त हजारों की संख्या में आते हैं और माता का दर्शन करते हैं।
आदि काल से यहां मां की पूजा अर्चना की जाती है। यहां मां भगवती भक्त की पुकार पर प्रकट हुई थीं। यहां पूजा अर्चना करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।
ऐसे पहुंचे मंदिर
जिला मुख्यालय से प्रत्येक पांच मिनट पर आटो व बस की सुविधा है। इसके अलावा थावे जंक्शन पर पटना, सिवान, छपरा व गोरखपुर से आने के लिए ट्रेन की सुविधा है। मंदिर के समीप स्थित देवी हॉल्ट पर सभी ट्रेन रुकती है।
भक्त रहषु व चेरों से जुड़ा इतिहास
शक्ति पीठ का इतिहास भक्त रहषु स्वामी तथा चेरों वंश के क्रूर राजा की कहानी जुड़ी हुई है। 1714 के पूर्व यहां चेरों वंश के राजा मनन सेन का साम्राज्य हुआ करता था। इस क्रूर राजा के दबाव डालने पर भक्त रहषु स्वामी की पुकार पर मां भवानी कामरूप कामाख्या से चलकर थावे पहुंचीं।
उनके थावे पहुंचने के साथ ही राजा मनन का महल खंडहर में तब्दील हो गया और भक्त रहषु के सिर से मां ने अपना कंगन युक्त हाथ प्रकट कर राजा को दर्शन दिया। देवी दर्शन के साथ ही राजा मनन के प्राण भी पखेरू हो गए। तब से यहां मां की अराधना होती आ रही है।
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मंदिर की विशेषता
ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर तीन ओर से वन प्रदेश से घिरा हुआ है। वन प्रदेश से घिरे होने के कारण पूरा मंदिर परिसर रमणीय दिखता है। मंदिर में प्रवेश व निकास के लिए एक-एक द्वार हैं। यहां सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध हैं। मान्यता है कि मां के दर्शन मात्र से लोगों की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
सप्तमी व अष्टमी को विशेष पूजा
यहां सालों भर मां की दिन में दो बार आरती होती है। नवरात्र को छोड़ अन्य दिनों में रात्रि की आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिये जाते हैं। लेकिन नवरात्र के दौरान कपाट बंद नहीं होते। सप्तमी व अष्टमी को यहां मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सप्तमी को महाप्रसाद का वितरण किया जाता है।
क्या कहते हैं पुजारी?
मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। चैत्र व शारदीय नवरात्र के समय थावे दुर्गा मंदिर में बिहार के अलावा यूपी व नेपाल तक से भक्त यहां मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। मां भगवती सभी की मनोकामना पूर्ण करती हैं। - संजय पांडेय, पुजारी