Vaishakh Month 2026: 3 अप्रैल से 1 मई तक चलेगा वैशाख मास, अक्षय तृतीया-जानकी नवमी समेत कई पर्व
सनातन धर्म में वैशाख मास को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है, जो 3 अप्रैल से 1 मई तक चलेगा। यह श्री हरि विष्णु को प्रिय है और इसमें कई प्रमुख पर्व आते हैं ...और पढ़ें

3 अप्रैल से 1 मई तक चलेगा वैशाख मास, अक्षय तृतीया-जानकी नवमी समेत कई पर्व

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, पटना। सनातन धर्म में वैशाख को अति पुण्यकारी माना गया है। वैशाख माह का आरंभ तीन अप्रैल शुक्रवार से हो रहा है, जो एक मई शुक्रवार को खत्म होगा। माह में प्रमुख व्रतों में वरुथिनी एकादशी, परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया, जानकी नवमी, मोहिनी एकादशी, बुद्ध पूर्णिमा समेत अन्य है। वैशाख माह धर्म, यज्ञ करने वाला मास होता है। वैशाख मास संपूर्ण देवताओं द्वारा पूजित है। श्री हरि विष्णु को यह मास अत्यंत प्रिय है।
ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि वैशाख में अन्न, वस्त्र , ऋतुफल, जलदार घट, पादुका आदि दान का विशेष महत्व है। ऋतु परिवर्तन की वजह से सूर्य की तपिश बढ़ जाती है। ऐसे में जल दान करना पुण्य माना जाता है। माह में नए कार्य का आरंभ, वस्तुओं की खरीदारी, भूमि-भवन, रत्न, वाहन खरीदने का उत्तम समय होता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग में अक्षय तृतीया:
वैशाख शुक्ल तृतीया 20 अप्रैल सोमवार को ग्रह-गोचरों के शुभ संयोग में अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 07:36 बजे तक कृत्तिका नक्षत्र उसके बाद पुरे दिन रोहिणी नक्षत्र रहेगा।
इसके साथ ही अक्षय तृतीया के दिन सौभाग्य योग, शोभन योग, रवियोग, संधिकर योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग का उत्तम संयोग भी रहेगा।
इस पुण्यकारी तिथि पर स्नान, दान, व्रत, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, शुभ कार्य आदि करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती हैं। इस दिन गंगा, सागर व तीर्थ में स्नान से कई गुना पुण्यफल प्राप्त होते है।
अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण, रजत, धातु, रत्न व अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व होता है। भविष्य पुराण के अनुसार इसी दिन सतयुग व त्रेता युग का आरंभ तथा महाभारत का अंत हुआ था।
रवि योग में जानकी नवमी:
मिथिला के विश्वविद्यालय पंचांग के आधार पर वैशाख शुक्ल नवमी 25 अप्रैल शनिवार को अश्लेषा नक्षत्र, रवियोग व सिद्ध योग के सुयोग में जानकी नवमी का पर्व मनाया जाएगा। जनक नंदिनी माता सीता का प्राकट्योत्सव पूरे देश में विशेषकर मिथिला में धूमधाम से मनाया जाता है।
सुहागिन महिलाएं अपने सौभाग्य रक्षा और पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखेंगी। इस दिन माता सीता की जन्म स्थली सीतामढ़ी में सीता-राम के साथ राजा जनक, माता सुनयना, हल और पृथ्वी की पूरे विधि-विधान से पूजन करने का विधान है।
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सिद्धि योग मनेगा बुद्ध पूर्णिमा
बुद्ध पूर्णिमा का पर्व वैशाख शुक्ल पूर्णिमा एक मई शुक्रवार को स्वाति नक्षत्र व सिद्धि योग के साथ बव करण के सुयोग में मनेगी। वैशाख पूर्णिमा को श्रद्धालु स्नान-दान कर श्री हरि व माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करेंगे। इस दिन घृत, स्वर्ण, शीतल जल, अन्न, ऋतुफल, सुपारी, यज्ञोपवीत आदि का दान करना शुभ होता है।
| त्योहार का नाम | तिथि |
|---|---|
| वरुथिनी एकादशी | 13 अप्रैल |
| प्रदोष व्रत | 15 अप्रैल |
| वैशाख अमावस्या | 17 अप्रैल |
| परशुराम जयंती | 19 अप्रैल |
| अक्षय तृतीया | 20 अप्रैल |
| गंगा सप्तमी | 23 अप्रैल |
| जानकी नवमी | 25 अप्रैल |
| मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल |
| श्रीनृसिंह चतुर्दशी | 30 अप्रैल |
| बुद्धा पूर्णिमा | 01 मई |