Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 22, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Varuthini Ekadashi 2025: वरूथिनी एकादशी पर करें इस कथा का पाठ, शुभ फलों की होगी प्राप्ति

    Updated: Thu, 24 Apr 2025 08:44 AM (IST)

    वरूथिनी एकादशी का दिन हिदुओं में बहुत ज्यादा महत्व रखता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त इस दिन व्रत रखते हैं ...और पढ़ें

    Varuthini Ekadashi 2025: वरूथिनी एकादशी की कथा।
    Varuthini Ekadashi 2025: वरूथिनी एकादशी की कथा।

    HighLights

    1. एकादशी तिथि को बेहद शुभ माना गया है।
    2. एकादशी व्रत भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है।
    3. एकादशी माह में दो बार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वरूथिनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस शुभ दिन पर भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। एक साल में कुल 24 एकादशी मनाई जाती हैं। वहीं, एक महीने में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में दो एकादशी आती हैं। इस साल वरूथिनी एकादशी का व्रत वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 24 अप्रैल, 2025 यानी आज रखा जा रहा है।

    अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इसकी कथा (Varuthini Ekadashi 2025) का पाठ जरूर करें, क्योंकि इसके बिना एकादशी व्रत अधूरा माना जाता है, तो आइए यहां पढ़ते हैं।

    वरूथिनी एकादशी कथा (Varuthini Ekadashi 2025 Katha)

    एक बार नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा का राज हुआ करता था। वह बड़ा ही तपस्वी था। एक समय ऐसा आया कि राजा की तपस्या के दौरान एक जंगली भालू आया और उसके पैर को चबाने लगा, लेकिन राजा तपस्या में लीन रहा। भालू राजा को घसीट कर जंगल में ले गया। भालू को देख राजा अधिक डर गया। इस दौरान उसने भगवान भगवान विष्णु से जीवन की रक्षा के लिए प्रार्थना की। उसकी पुकार सुन प्रभु वहां प्रकट हुए और भालू को मारकर राजा के प्राण बचाए।

    तब तक भालू ने राजा का पैर खा लिया था। इसकी वजह वह बेहद दुखी था। राजा को इस परिस्थिति में देख भगवान विष्णु ने उसको एक उपाय बताया। प्रभु ने राजा को वरूथिनी एकादशी करने के लिए कहा।

    राजा ने प्रभु की बात को मानकर वरूथिनी एकादशी व्रत किया और उसने वराह अवतार मूर्ति की पूजा की। इसके बाद इस व्रत के प्रभाव से राजा फिर से सुंदर शरीर वाला हो गया। मृत्यु के पश्चात उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इसी तरह वरूथिनी एकादशी की शुरुआत हुई।

    यह भी पढ़ें: Sita Navami 2025: इन शुभ योग में मनाई जाएगी सीता नवमी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

    खबरें और भी