वट सावित्री व्रत पर क्यों होती है बरगद के पेड़ की पूजा? पढ़ें महत्व और अखंड सौभाग्य के उपाय
सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत बेहद खास होता है। जानें आखिर क्यों होती है बरगद के पेड़ की पूजा, इसका धार्मिक महत्व, सही पूजा विधि। ...और पढ़ें

वट सावित्री व्रत पर क्यों है बरगद के पेड़ का महत्व? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वट सावित्री का पावन व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं और वट यानी बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करती हैं।
वट सावित्री व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में वट सावित्री का व्रत 16 मई को रखा जाएगा।
अमावस्या तिथि का आरंभ: 16 मई 2026, सुबह 05:11 बजे से
अमावस्या तिथि का समापन: 17 मई 2026, रात 01:30 बजे तक
उदयातिथि और पंचांग की गणना के अनुसार, वट सावित्री का पूजन और व्रत शनिवार, 16 मई को ही करना शुभ होगा।
बरगद के पेड़ का महत्व
हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ को देवतुल्य माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र पेड़ में त्रिदेवों का वास होता है। पेड़ की जड़ में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और ऊपरी हिस्से में भगवान शिव निवास करते हैं। इसकी नीचे की तरफ लटकती हुई शाखाओं को माता सावित्री का रूप माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पेड़ के नीचे माता सावित्री ने अपने पतिव्रता धर्म के प्रभाव से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। इसीलिए इस दिन बरगद की पूजा का विशेष महत्व है।

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सरल पूजा विधि
व्रत के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार करती हैं। इसके बाद बरगद के पेड़ को जल, अक्षत (चावल) और फूल अर्पित किए जाते हैं। महिलाएं पेड़ के तने पर लाल या पीला सूत (धागा) लपेटते हुए श्रद्धा भाव से परिक्रमा करती हैं। सिंदूर चढ़ाने और माता सावित्री की पूजा करने के बाद कथा सुनी जाती है और फिर भोग लगाकर व्रत खोला जाता है।
बरगद के पेड़ से जुड़े अचूक उपाय
- आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: शुक्रवार को बरगद के साफ पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं। इसे मां लक्ष्मी के पास रखकर पूजा करें और फिर अपनी तिजोरी या अलमारी में रख लें। ऐसा 21 शुक्रवार करने से धन की कमी दूर होती है।
- नौकरी व व्यापार में तरक्की: मनचाही नौकरी के लिए वट सावित्री के दिन पत्ते पर अपनी परेशानी लिखकर रविवार को जल में प्रवाहित करें। व्यापार में नुकसान हो रहा हो, तो इस दिन बरगद के नीचे घी के 5 दीपक जलाएं।
- पारिवारिक शांति के लिए: घर में रोज झगड़े होते हों, तो प्रतिदिन बरगद के पेड़ के नीचे त्रिदेवों का ध्यान करते हुए घी का दीपक जलाएं।
- रोग मुक्ति के लिए: मानसिक तनाव या बीमारी दूर करने के लिए बरगद के नीचे हनुमान चालीसा का पाठ करें। बीमार व्यक्ति के तकिए के नीचे बरगद की जड़ रखने से भी स्वास्थ्य में सुधार होता है।
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