Vikata Sankashti Chaturthi 2026: वैशाख संकष्टी चतुर्थी कब है? व्रत से पहले जान लें इससे जुड़े नियम
विकट संकष्टी चतुर्थी (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) भगवान गणेश को समर्पित है, जो वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। ...और पढ़ें

Vikata Sankashti Chaturthi 2026: वैशाख संकष्टी चतुर्थी का महत्व। Ai Generated Image
HighLights
वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का बड़ा महत्व है
विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत संतान सुख के लिए शुभ माना गया है
चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बिना अधूरा माना जाता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Vikata Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से जीवन के कठिन से कठिन संकट दूर हो जाते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए इस व्रत से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त (Vikata Sankashti Chaturthi 2026 Shubh Muhurat)
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल दिन रविवार को सुबह 11 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 6 अप्रैल को दोपहर में 2 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में वैशाख संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल को रखा जाएगा।
व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण नियम (Vikata Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Rules)
- व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर सात्विक रहें और क्रोध या अपशब्दों से बचें।
- सूर्यास्त के बाद गणेश जी की मूर्ति को लाल कपड़े पर स्थापित करें।
- उन्हें सिंदूर, अक्षत, फूल और 21 दूर्वा चढ़ाएं।
- बप्पा को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
- रात में जब चंद्रमा उदय हो, तब चांदी के पात्र या लोटे में दूध, जल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
- इसके बाद ही व्रत का पारण करें।
- पूजा का समापन आरती से करें।
- पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
पूजन मंत्र (Vikata Sankashti Chaturthi 2026 Pujan Mantra)
- ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय।।
- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देवा, सर्व कार्येषु सर्वदा।।
- ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे, प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे, निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे।।
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