बिना इस आरती के अधूरी है संकष्टी चतुर्थी की पूजा, जरूर करें इसका पाठ
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है और संकष्टी चतुर्थी का व्रत आरती के बिना अधूरा माना जाता है, जो इस प्रकार हैं - ...और पढ़ें

Vikata Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी आरती। (Ai Generated Image)
HighLights
विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत आज किया जा रहा है
इस दिन गणेश जी की पूजा होती है
यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद पूर्ण होता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम या पूजा की शुरुआत भगवान श्री गणेश की पूजा से होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि संकष्टी चतुर्थी का कठिन व्रत और घंटों की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक कि अंत में भक्ति भाव के साथ भगवान गणेश की आरती न की जाए? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आरती पूजा की पूर्णता का प्रतीक है। ऐसे में आज विकट संकष्टी चतुर्थी (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) के पावन अवसर पर अगर आप भी बप्पा का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो यहां दी गईं दिव्य आरती का पाठ जरूर करें, जो इस प्रकार हैं -

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॥श्री गणेश जी की आरती॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
।। चन्द्र देव की आरती।।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।।
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