क्यों हर महीने बदल जाता है संकष्टी चतुर्थी का नाम? पढ़ें इसका कारण और व्रत का महत्व
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक मासिक व्रत है, जो हर चंद्र माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि ...और पढ़ें
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संकष्टी चतुर्थी का अलग-अलग नाम (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है। किसी भी मंगल कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा और वंदना की जाती है। इसके अलावा साल के प्रत्येक महीने में एक ऐसा दिन होता है, जो उनकी पूजा के लिए खासतौर पर समर्पित होता है।
संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय मासिक व्रतों में शामिल है। माना जाता है कि इसे करने जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने के साथ ज्ञान के प्रतीक कहे जाने वाले गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है। जहां कुछ व्रत और त्योहार साल में एक बार आते हैं, वहीं संकष्टी चतुर्थी हर चंद्र माह में आती है, लेकिन हर महीने इसका नाम बदल जाता है।
संकष्टी चतुर्थी क्या है?
हिंदू चंद्र पंचांग के मुताबिक, संकष्टी चतुर्थी हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी चौथे दिन मनाई जाती है, जो चंद्रमा के घटते चरण का समय होता है।
संकष्टी शब्द संस्कृत से जुड़ा शब्द है, जिसमें संकट का अर्थ मुश्किल और चतुर्थी का अर्थ है चंद्रमा का चौथा दिन, यानी इसका मतलब कठिनाइयों को दूर करने का पवित्र समय है।
संकष्टी चतुर्थी के अलग-अलग नाम
हिंदू पंचांग के मुताबिक, हर साल चंद्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ने वाली तिथि को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। हर महीने भगवान गणेश की पूजा अलग-अलग नामों के साथ की जाती है।
भविष्य पुराण और नरसिंह पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों में साल में पड़ने वाली सभी 13 (अधिक मास समेत) संकष्टी चतुर्थी व्रतों के महत्व का उल्लेख किया गया है। 13 संकष्टी चतुर्थी के नाम नीचे दिए गए हैं-
- चैत्र मास- विकट संकष्टी चतुर्थी
- वैशाख मास- एकदंत संकष्टी चतुर्थी
- जेष्ठ मास- कृष्ण पिंगला संकष्टी चतुर्थी
- आषाढ़ मास- गजानन संकष्टी चतुर्थी
- श्रवण मास- हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी
- भाद्रपद मास- विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी
- अश्विन मास- वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी
- कार्तिक मास- गणाधीपा संकष्टी चतुर्थी
- मार्गशीर्ष मास- अखुरथ संकष्टी चतुर्थी
- पौष मास- लंबोदर संकष्टी चतुर्थी
- माघ मास- द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
- फाल्गुन मास- बालचंद्र संकष्टी चतुर्थी
- अधिक मास- विभुवन संकष्टी चतुर्थी
हर महीने क्यों बदल जाता है नाम?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, जो भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान गणेश के अलग-अलग रूपों का वर्णन किया गया है।
जिस वजह से प्रत्येक माह की संकष्टी चतुर्थी को उनके एक खास रूप के साथ जोड़ा गया है। यही वजह है कि किसी महीने की संकष्टी चतुर्थी को व्रकतुंड संकष्टी के नाम से बुलाया जाता है, तो किसी महीने की चतुर्थी एकदंत संकष्टी के नाम से कहलाती है।
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