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    भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी कब होते हैं गरुड़ पर सवार? यहां पढ़ें इसके पीछे की पौराणिक मान्यता

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 06:45 PM (IST)

    भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के वाहन गरुड़ का विशेष महत्व है, जिसे पक्षियों का राजा कहा जाता है। वे पृथ्वी पर अधर्म बढ़ने और भक्तों की रक्षा के लिए गर ...और पढ़ें

    गरुड़ पर क्यों सवार होते हैं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (Picture Credit- AI)

    गरुड़ पर क्यों सवार होते हैं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (Picture Credit- AI)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर देवी-देवता का अपना अलग वाहन होता है। इसी प्रकार, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के वाहन गरुड़ का भी विशेष महत्व है। भगवान विष्णु जहां शेषनाग की शैया पर विराजते हैं, वहीं वैकुंठ जाने के समय वे गरुड़ पर सवार होकर यात्रा करते हैं। क्या आप जानते हैं कि आखिर गरुड़ कौन हैं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी उनके वाहन के रूप में गरुड़ को क्यों चुना है? आइए, इसके पीछे के पौराणिक रहस्य को विस्तार से जानते हैं।

    गरुड़ कौन हैं?

    गरुड़ को पक्षियों का राजा कहा जाता है। इसे भगवान विष्णु का वाहन भी कहते हैं। गरुड़ का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली होता है, उनका मुख पक्षी जैसा है, लेकिन शरीर मनुष्य के समान बड़ा होता है। इनका वर्णन गरुड़ पुराण में भी किया जाता है।

    गरुड़ पर कब सवार होते हैं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी?

    भगवान विष्णु का गरुड़ पर सवार होना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा संदेश छिपा होता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी अपने वाहन गरुड़ पर सवार होकर आते हैं। गरुड़ का वेग अत्यंत तीव्र है, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए बिना किसी देरी के धरती पर आ रहे हैं।

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    Image Credit- AI

    गरुड़ को वेद स्वरूप कहा जाता है। जब कोई भक्त संकट में होता है और सच्चे मन से भगवान विष्णु को पुकारा जाता है, तब भगवान गरुड़ पर सवार होकर उसकी रक्षा के लिए आते हैं। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जब गरुड़ पर सवार होते हैं, तो यह इस बात का प्रतीक है कि जहां धर्म और ऐश्वर्य साथ होते हैं, वहां हर कार्य होना संभव हो जाता है।

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    क्या है इसका आध्यात्मिक अर्थ?

    गरुड़ पर सवार होने का अर्थ यह भी है कि 'गरुड़' वेदों के ज्ञानी कहे जाते हैं। भगवान विष्णु, जो स्वयं ज्ञान के स्रोत हैं, वेदों के माध्यम से ही इस संसार का संचालन करते हैं। ज्ञान ही वह माध्यम है जो मनुष्य को मोह-माया से मुक्त कराता है और व्यक्ति को सही राह दिखाता है।

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