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हिंदू शादियों में फेरे के बाद वर-वधू को क्यों दिखाया जाता है ध्रुव तारा, इसका धार्मिक महत्व क्या है?

Published: Thu, 03 Sep 2026 07:18 PM (IST)

हिंदू शादियों में फेरों के बाद वर-वधू को ध्रुव तारा दिखाने की रस्म निभाई जाती है, जो उनके वैवाहिक जीवन में स्थिरता और प्रेम का प्रतीक है।

हिंदू विवाह में ध्रुव तारा दर्शन का महत्व जानें (Picture Credit: AI Genrated)

हिंदू विवाह में ध्रुव तारा दर्शन का महत्व जानें (Picture Credit: AI Genrated)

HighLights

  1. ध्रुव तारा स्थिर, अटल प्रेम का प्रतीक है।

  2. पति-पत्नी के रिश्ते में मिठास का प्रतीक माना जाता है।

  3. कठिनाइयों में भी रिश्ते को मजबूत रखने की प्रेरणा देता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू शादियों में न जाने कितनी ऐसी रस्में निभाई जाती हैं जिनके बारे में हम सभी नहीं जानते हैं। सात फेरों के सात वचन से लेकर सिंदूरदान, मंडप में हल्दी की रस्म से लेकर कन्यादान तक न जाने कितने ऐसे रिवाज हैं जो हिंदू शादियों को खास बनाते हैं।

वहीं हिंदू शादियों की एक रस्म यह भी है जिसमें दूल्हे और दुल्हन को फेरों के बाद उत्तर दिशा की तरफ मौजूद ध्रुव तारा दिखाया जाता है। हिंदू धर्म में विवाह के समय कई रीति रिवाजों को निभाया जाता है इनके पीछे कोई ना कोई धार्मिक या ज्योतिष कारण जरूर छुपा होता है।

आइए आपको बताते हैं इस रस्म का क्या महत्व है और इस दौरान ध्रुव तारा दिखाने से वैवाहिक जीवन में इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

ध्रुव तारा देता है अटल सौभाग्य का आशीर्वाद

ऐसा माना जाता है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस तरह आसमान में ध्रुव तारा स्थिर बना रहता है ठीक उसी तरह नव विवाहित दंपति के जीवन में हमेशा प्रेम स्थिर बना रहे।

उनका रिश्ता अटल रहे और उसमें कभी किसी तरह की दूरियां न आएं। अखंड रिश्ते का प्रतीक माना जाने वाला ध्रुव तारा इसी का का आशीर्वाद प्रदान करता है। साथ ही, यह भी संदेश मिलता है कि नव दम्पत्ति अपना सारा जीवन खुशहाल तरीके से व्यतीत करें।

ध्रुव तारा पति-पत्नी के रिश्ते में मिठास का प्रतीक

धार्मिक मान्यता के अनुसार ध्रुव तारे को शुक्र तारा भी कहा जाता है। जब विवाह की रस्मों के दौरान ध्रुव तारा दिखाया जाता है तब इसे दिखाने का मतलब है कि पति-पत्नी के संबंध भविष्य में हमेशा मधुर बने रहेंगे, क्योंकि शुक्र ग्रह को प्रेम संबंधों और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

इस कामना के साथ ध्रुव तारा दिखाया जाता है कि पति-पत्नी दोनों ही ध्रुव तारे की तरह अक्षय और मधुर संबंधों का आशीर्वाद प्राप्त करें। ध्रुव तारे की स्थिरता को देखकर यह संदेश मिलता है कि भावी दंपति भी अपने रिश्ते में स्थिर रहें और उनके जीवन में किसी तरह का भटकाव न आए।

वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने की कामना

ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्मांड के सभी तारे और ग्रह समय-समय पर अपनी जगह बदलते हैं, लेकिन 'ध्रुव तारा' ऐसा होता है जो हमेशा एक ही जगह पर रहता है।

शादी की रस्मों के दौरान वर-वधु को ध्रुव तारा दिखाने का एक मात्र उद्देश्य उनके जीवन के लिए ऐसी कामना करना होता है कि जीवन में चाहे जितनी भी परेशानियां आएं उन्हें अपने रिश्ते को मजबूत बाने रखना होगा। जिस प्रकार यह तारा आंधी, तूफान और समय के बदलने पर भी अपने स्थान पर ही टिका रहता है उसी प्रकार जीवन में चाहे जितने भी सुख-दुख आएं पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे के प्रति प्रेम बनाए रखें।

शादी में ध्रुव तारे के दर्शन बहुत शुभ माने जाते हैं और इससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद भी मिलता है।

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