कानपुर-लखनऊ में दीवाली पर निभाई जाती है कूलिया-चुकिया की रस्म, लक्ष्मी पूजन में क्यों पूजी जाती है घर-गृहस्थी?
दीवाली पर कानपुर-लखनऊ और यूपी के कई क्षेत्रों में कूलिया-चुकिया की खास रस्म निभाई जाती है। जानिए लक्ष्मी पूजन के ...और पढ़ें

दीवाली पर कुल्हिया-चुकिया भरने की खास रस्म । (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली का त्योहार केवल धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी की पूजा तक सीमित नहीं है। इस पर्व पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसी परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ सामाजिक और पारिवारिक महत्व भी छुपा होता है। उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ और आसपास के कई क्षेत्रों में दीवाली पर कुल्हिया-चुकिया भरने की ऐसी ही एक खास रस्म निभाई जाती है।
इस परंपरा में मिट्टी के छोटे-छोटे बर्तनों को खील, बताशे और मिठाइयों से भरा जाता है। इतना ही नहीं, इस दिन मिट्टी के घरौंदे और घर-गृहस्थी से जुड़ी चीजों की पूजा भी की जाती है। आखिर लक्ष्मी पूजन के दिन घर के छोटे-छोटे बर्तनों और गृहस्थी की पूजा क्यों होती है? इसके पीछे क्या धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं हैं? आइए जानते हैं वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर से जुड़े पंडित श्रीनिवास गोस्वामी जी से जानते हैं।
क्या होती है कुल्हिया-चुकिया भरने की रस्म?
पंडित श्रीनिवास गोस्वामी बताते हैं, " कुल्हिया-चुकिया मिट्टी से बने छोटे-छोटे बर्तन होते हैं, दीवाली के अवसर पर इन्हें घर लाया जाता है। फिर इनमें खील, बताशे, धान का लावा, फरही और मिठाइयां भरी जाती हैं। यूपी के कई क्षेत्रों में यह रस्म देखने को मिलती है। पहले के समय में तो यह दीवाली का एक अनिवार्य रस्म होती थी। इसे निभाने में मजा भी आता था। लोक गीत गाते हुए इस रस्म को निभाया जाता था। हालांकि, अब लोगों के पास समय ही नहीं है। अब बस खाना पूर्ती ही रह गई है। कई लोगों को तो इस रस्म के मायने भी नहीं पता हैं।"
कई घरों में इस अवसर पर मिट्टी का छोटा-सा घरौंदा भी बनाया जाता है। इसे घर की तरह सजाया जाता है और इसके आसपास मिट्टी के छोटे बर्तन रखे जाते हैं। परिवार की महिलाएं और लड़कियां पूरे उत्साह से इस रस्म को निभाती हैं। कुछ घरों में बहनें अपने भाइयों की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए कुल्हिया-चुकिया भरती हैं और बाद में भाई प्रसाद ग्रहण करते हैं।
लक्ष्मी पूजन के समय क्यों होती है घर-गृहस्थी की पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी केवल धन और सोने-चांदी की देवी नहीं हैं, बल्कि अन्न, सौभाग्य और समृद्धि की भी प्रतीक हैं। घर में भरा हुआ अन्न भंडार, भरी और साफ-सुथरी रसोई भी मां लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक माना जाता है। पंडित जी से इस विषय पर बताते हैं, "कुल्हिया-चुकिया में अन्न और मिठाइयां भरना यानी यह कामना करना होता है कि मां लक्ष्मी पूरे वर्ष घर के भंडार को भरा रखें। मिट्टी के बर्तन गृहस्थ जीवन, अन्न और घरेलू समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।"
अत: कानपुर-लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में निभाई जाने वाली कुल्हिया-चुकिया की रस्म दीवाली को और भी ज्यादा खास बनाती है।
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