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दिन या रात? जानिए किस समय दुर्गा सप्तशती का पाठ देता है सबसे विशेष फल

Published: Wed, 09 Sep 2026 11:31 AM (IST)Updated: Thu, 10 Sep 2026 09:19 AM (IST)

दुर्गा सप्तशती पाठ का विशेष महत्व है, जिसे सुबह या रात दोनों समय किया जा सकता है। रात में पाठ ...और पढ़ें

दुर्गा सप्तशती के रात्रि पाठ के नियम (Picture Credits- AI Images)

दुर्गा सप्तशती के रात्रि पाठ के नियम (Picture Credits- AI Images)

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समय कम है?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देवी दुर्गा जिन्हें हिंदुओं की प्रमुख देवी भी माना जाता है। मां दुर्गा को भक्त नव दुर्गा, आदि शक्ति, भगवती, माता पार्वती, जगत जननी जैसे कई नामों से बुलाते है। सनातन धर्म में मां दुर्गा की उपासना और पूजा एक अलौकिक ऊर्जा का आह्वान है।

मां दुर्गा की पूजा हर कोई अपने समय के हिसाब से करता है। किसी को सुबह के समय पूजा करना सबसे ज्यादा पसंद होती है, तो कोई रात में मां दुर्गा की उपासना करता है। दुर्गा सप्तशती से जानिए किस समय पूजा करने से भगवती अति प्रसन्न होती है?

भगवती की पूजा के लिए सबसे बेस्ट टाइमिंग

वैसे तो देवी दुर्गा की पूजा और सप्तशती का पाठ आप सुबह या रात दोनों समय पढ़ सकते हैं। लेकिन रात के समय दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस समय आसपास का वातावरण काफी शांत होता है।

हिंदू धर्म शास्त्रों में देवी दुर्गा को 'कालरात्रि' और 'निशामुखी' कहकर भी बुलाया जाता है। माना जाता है कि भगवती को रात्रि काफी प्रिय होती है। रात में मां दुर्गा की पूजा, या उनसे जुड़े किसी भी पाठ का स्मरण करता है मां दुर्गा उससे काफी प्रसन्न होती है।

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दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम

दुर्गा सप्तशती का पाठ सुबह, शाम और रात तीनों ही समय किया जा सकता है। खासकर नवरात्रि के दौरान इसका पाठ जरूर करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती पाठ करने से पहले स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। इसके बाद श्री दुर्गा सप्तशती की किताब को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर विराजमान कर दें। आसन को गंगा जल से शुद्ध करने के बाद ही आसन पर बैठे।

रात के समय पाठ करने से पहले स्नान कर पवित्र होना बेहद जरूरी है। पाठ करने के दौरान मन को एकाग्र रखना चाहिए।

रात के समय दुर्गा सप्तशती का पाठ इस लिए भी विशेष फलदायी है, क्योंकि शांत वातावरण में पाठ को पढ़ने से दिमाग एकाग्र रहता है, जिससे वजह से व्यक्ति संपूर्ण आध्यात्मिक लाभ उठा पाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।