क्या है शादी का असली वैदिक मुहूर्त, दक्षिण में दिन तो उत्तर भारत में रात को क्यों होते हैं फेरे?
उत्तर भारत में शादियां रात के अंधेरे में क्यों होती हैं? जानें कैसे दिन के बजाय रात में फेरे लेने की यह 'परंपरा' शुरू हुई। ...और पढ़ें

Wedding Vedic Muhurat: किस मुहूर्त में होनी चाहिए शादियां? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में शादियों का जश्न देखने लायक होता है। ढोल-नगाड़े, नाच-गाना और खूब सारी रोशनी। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि उत्तर भारत (North India) में शादियां अक्सर देर रात को क्यों होती हैं। जबकि, दक्षिण भारत (South India) में आज भी सुबह-सुबह फेरे लिए जाते हैं?
शायद आप इसे सिर्फ एक रस्म या रिवाज समझते हों, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर भारत में रात की शादी कोई 'वैदिक रस्म' नहीं है। असल में, यह एक दौर में अपनी जान और इज्जत बचाने का एक तरीका (Survival tactic) था। वैदिक ट्रेडिशन के हिसाब से देवता दिन में ज्यादा एक्टिव होते हैं इसलिए फेरे भी दिन में ही होते हैं।
क्या कहता है हमारा वैदिक नियम?
हिंदू धर्म के प्राचीन शास्त्रों और वैदिक नियमों के अनुसार, विवाह हमेशा दिन के उजाले में होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सात फेरे सूर्य देव और पवित्र अग्नि देव की साक्षी में होने चाहिए। दक्षिण भारत के लोगों ने इस वैदिक परंपरा को आज तक सहेज कर रखा है। वहां शादियां आज भी सूर्योदय के बाद और दिन के शुभ मुहूर्त में ही संपन्न होती हैं।

(Image Source: AI-Gene)
शादी के 'मुहूर्त' का सच
- वेदों और शास्त्रों के अनुसार, विवाह का सबसे शुभ समय सूर्य की उपस्थिति में होता है। सूर्य को 'जगत की आत्मा' माना जाता है, इसलिए उनके प्रकाश में फेरे लेना सबसे पवित्र माना गया है।
- हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दिन का समय 'देवताओं' का होता है जब सात्विक ऊर्जा चरम पर होती है। रात का समय अक्सर तामसिक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है।
- दरअसल, इस बात का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है लेकिन कहा जाता है कि मध्यकाल में डाकुओं और आक्रमणकारियों से अपनी बेटियों और धन-संपत्ति को बचाने के लिए उत्तर भारतीयों ने रात के अंधेरे में शादियां करना शुरू किया।
- रात में शादी करना कोई धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि एक रणनीतिक फैसला था। ताकि, शत्रुओं को विवाह की भनक न लगे और बिना किसी बाधा के संस्कार संपन्न हो सकें।
- 'बारात' दरअसल दूल्हे के साथ जाने वाले उन योद्धाओं और पुरुषों का समूह होता था, जो हथियारों से लैस होते थे ताकि रास्ते में या मंडप पर होने वाले किसी भी हमले का मुकाबला कर सकें।
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