क्यों त्रिजटा के सामने बेबस हो जाता था रावण? पढ़ें यह पौराणिक कथा
रामायण में रावण और उसकी भतीजी त्रिजटा के रहस्यमयी रिश्ते का वर्णन है। विभीषण की पुत्री त्रिजटा को भविष्य का ज्ञान था और उसके सपने कभी झूठे नहीं होते थ ...और पढ़ें

Trijata And Ravana Story: त्रिजटा का सपना।
HighLights
त्रिजटा रावण के छोटे भाई विभीषण की पुत्री थी।
त्रिजटा में भी दैवीय ज्ञान और शक्तियां थीं
त्रिजटा के सपने हमेशा सच होते थे
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण के कई ऐसे पात्र हैं, जिनकी कहानियां आज भी हमें हैरान करती हैं। ऐसा ही एक रहस्यमयी रिश्ता था लंकापति रावण और उसकी भतीजी त्रिजटा का। रावण जो अपनी शक्ति और ज्ञान के लिए जाना जाता था, लेकिन वह अपनी ही भतीजी त्रिजटा के सामने बहुत डरा रहता था। इस डर के पीछे एक पौराणिक कथा है, आइए उस कथा को पढ़ते हैं।

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कौन थी त्रिजटा?
त्रिजटा रावण के छोटे भाई विभीषण की पुत्री थी। जैसे विभीषण बहुत ज्ञानी थे और वैसे ही उनकी पुत्री त्रिजटा में भी दैवीय ज्ञान और शक्तियां थीं। उसे भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले ही पता चल जाता था और उसके देखे गए सपने कभी झूठे नहीं होते थे। त्रिजटा (Trijata Role In Ramayana) राक्षस कुल में जन्म लेने के बावजूद सत्य और न्याय के साथ खड़ी थी। वह जानती थी कि रावण अधर्म कर रहा है और उसका अंत तय है।
त्रिजटा का सपना (Trijata And Ravana Story)
जब माता सीता अशोक वाटिका में थीं, तो रावण ने उन्हें परेशान करने के लिए कई राक्षसियों को उनके पास भेजा करता था। इन राक्षसियों में से एक त्रिजटा भी थी। एक रात, त्रिजटा ने एक ऐसा भयानक सपना देखा, जिसने उसे अंदर तक हिला दिया। उसने सपने में देखा कि पूरी लंका नगरी जलकर राख हो रही है। साथ ही रावण मारा गया है और विभीषण राम-लक्ष्मण, माता सीता के साथ पुष्पक विमान में विराजमान होकर लंका के ऊपर से निकल रहे हैं।
रावण का डर (Ravana Fear Of Trijata)
त्रिजटा ने यह सपना अन्य राक्षसियों को सुनाया और कहा कि यह सपना जल्द ही सही होगा। उसकी इस बात से सभी राक्षसियां डर गईं और माता सीता को परेशान करना बंद कर दिया। वहीं, जब रावण को इस सपने और त्रिजटा की भविष्यवाणी की बात पता चली, तो वह भी बहुत परेशान हो गया, क्योंकि वह जानता था कि त्रिजटा के सपने कभी झूठे नहीं होते।
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