आखिर क्यों घर के मंदिर में नहीं रखनी चाहिए शनि देव की मूर्ति? यहां पढ़ें इसके पीछे का कारण
हिंदू धर्म में शनि देव को कर्मफल दाता माना जाता है, लेकिन उनकी मूर्ति घर के मंदिर में स्थापित करना ...और पढ़ें
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घर में मंदिर न रखें शनि देव की मूर्ति (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
शनि देव की सीधी दृष्टि को अशुभ माना जाता है।
पत्नी के श्राप के कारण उनकी दृष्टि टेढ़ी हुई थी।
घर में शनि देव की मूर्ति रखना समस्याओं को न्योता देता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय के देवता कहा जाता है, क्योंकि शनि देव व्यक्ति को कर्म के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं और वे किसी के साथ अन्याय नहीं करते। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनि देव की पूजा और उनपर सरसों का तेल चढ़ाने से जीवन में कई बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं।
शनि देव की कृपा से भक्त के जीवन के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, घर के मंदिर में शनि देव की मूर्ति को रखना वर्जित है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों घर के मंदिर में शनि देव की मूर्ति को स्थापित नहीं करना चाहिए, तो ऐसे में आइए में इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।
घर के मंदिर में क्यों नहीं रखते शनि देव की मूर्ति?
पौराणिक कथा के अनुसार, शनि देव भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। वे उनकी भक्ति में अधिक लीन रहते थे। एक बार शनि देव के पास उनकी पत्नी आईं, लेकिन शनि देव प्रभु के ध्यान में लीन थे। उनकी पत्नी के कई प्रयासों के बाद भी शनि देव ने उन्हें अनदेखा कर दिया, जिसकी वजह से पत्नी को क्रोध आया है और शनि देव को श्राप दिया कि आप जिस पर भी अपनी सीधी नजर डालेंगे, तो उसका बुरा हो जाएगा। इसी श्राप की वजह उनकी दृष्टि को टेढ़ी माना जाता है। इसलिए घर के मंदिर में शनि देव की मूर्ति को रखने के लिए मना किया जाता है।
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(Picture Credit- AI Generated)
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनि देव की सीधी नजर पड़ने से व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही कर्ज में वृद्धि और कारोबार में भारी नुकसान हो सकता है। उनकी तस्वीर रखने के बजाय आप शनिवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद शनि मंदिर जाएं। वहां पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और आरती करें। शनि देव पर सरसों के तेल अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि शनि देव की साधना करने से साढ़ेसाती, ढैया या शनि की महादशा के बुरे प्रभाव दूर होते हैं और सुख-समृद्धि में अपार वृद्धि होती है।
इन बातों का रखें ध्यान
शनि देव की ऐसे मूर्ति को मंदिर में स्थापित करना चाहिए, जिसमे वे शांत और बैठी हुई मुद्रा में हों। खड़ी हुई मुद्रा वाली मूर्ति उग्रता और संघर्ष का प्रतीक मानी जाती है।
शनि देव की मूर्ति काले पत्थर या लोहे की होनी चाहिए। तांबे या पीतल अन्य धातुओं की मूर्ति को मंदिर में विराजमान नहीं करना चाहिए।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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