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मंदिर की चौखट पर काले कपड़े पहनकर कदम रखने से क्या होता है? ज्योतिष एक्सपर्ट ने खोला बड़ा राज!

Published: Tue, 22 Sep 2026 06:05 PM (IST)

मंदिर में काले कपड़े पहनकर जाने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ज्योतिष के अनुसार यह नकारात्मक ऊर्जा ...और पढ़ें

मंदिर में काले वस्त्र क्यों नहीं पहनने चाहिए (Picture Credit: AI Generated)

मंदिर में काले वस्त्र क्यों नहीं पहनने चाहिए (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. काला रंग नकारात्मक ऊर्जा और राहु-शनि को आकर्षित करता है।

  2. यह आलस्य, कठोरता और तामसिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

  3. शुभता के लिए लाल, पीला, केसरिया जैसे रंग पहनना चाहिए।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने अक्सर घर के बड़े बुजुर्गों से मंदिर के नियम को लेकर कई बातें सुनी होंगी। स्नान करने के बाद ही मंदिर में प्रवेश करना चाहिए, प्रवेश से पहले सिर ढक लेना चाहिए और बालों को बांधकर ही पूजा के लिए जाना चाहिए। ऐसे ही कई नियमों में से एक है मंदिर के भीतर काले कपड़े न पहनकर प्रवेश करना।

काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है और इसी वजह से किसी भी शुभ काम में काले कपड़ों का इस्तेमाल वर्जित होता है। हमारे देश में मंदिर भक्ति, शांति और ईश्वर से व्यक्तिगत जुड़ाव की जगह मानें जाते हैं। ऐसी पवित्र जगहों पर हम जो कपड़े पहनते हैं, वे अक्सर हमारे मूल्यों और सांस्कृतिक समझ को दिखाते हैं। आइए एस्ट्रोपत्री ज्योतिषी शास्त्री रजनी गुप्ता से जानें कि मंदिर में काले कपड़े पहनने चाहिए या नहीं?

मंदिर में काले रंग के कपड़े पहनकर क्यों नहीं जाना चाहिए?

एस्ट्रोपत्री ज्योतिषी रजनी गुप्ता के अनुसार, आपको हमेशा मंदिरों में काले रंग के कपड़े पहनकर जाने से बचना चाहिए। इसके कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण इस प्रकार हैं-

काले कपड़ों से ऊर्जा प्रभावित होती है

ज्योतिष में मान्यता है कि काले कपड़ों से व्यक्ति और उस स्थान की ऊर्जा प्रभावित होती है। काला रंग आमतौर पर नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। यह रंग शनि और राहु का प्रतीक होता है और इस रंग का पूजा में इस्तेमाल करने से व्यक्ति के जीवन में इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

काले रंग के कपड़ों को पहनकर मंदिर में प्रवेश करने से राहु का प्रभाव जीवन में बढ़ सकता है और ये शनि दोष का कर भी बन सकता है।

काले रंग का स्वभाव पर प्रभाव

अगर कोई व्यक्ति काले रंग के कपड़े पहनकर मंदिर आता है तो यह उसके स्वभाव में भी बदलाव का कारण बन सकते हैं। इससे व्यक्ति को आलस्य आता है और व्यक्ति दूसरों पर हावी होने लगता है। काला रंग तामसिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से काले रंग को मंदिर जैसे पवित्र स्थान के लिए वर्जित माना जाता है, क्योंकि वहां शांति बनाए रखना जरूरी होता है।

मानसिक स्थिति पर काले रंग का प्रभाव

काला रंग हमेशा अंधकार, शोक, दुख, निराशा और स्वभाव में कठोरता का प्रतीक माना जाता है। मंदिर जाते समय व्यक्ति को भगवान के समक्ष सरल, सौम्य, निर्मल और विनम्र होना चाहिए। इसी वजह से जब कोई काले रंग के कपड़ों में मंदिर के भीतर प्रवेश करता है, तो उसे अपनी मानसिक स्थिति ठीक रखने और ईश्वर की भक्ति में मन लगाने के लिए काले कपड़ों से बचना चाहिए।

मंदिर के लिए सबसे शुभ रंग और उनका महत्व

मंदिर जाते समय आपको लाल, पीला, केसरिया, सफेद, सुनहरी और हरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। ये सभी रंग पूजा-पाठ के लिए बहुत शुभ माने जाते हैं और ये सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। अगर आप इन रंगों को मंदिर में दर्शन के समय पहनते हैं तो जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और ये शुभता का प्रतीक माने जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार, हर रंग किसी न किसी ग्रह को प्रभावित करता है और उसकी ऊर्जा को प्रभावित करता है।

अगर आप भी मंदिर में काले रंग के वस्त्र पहनकर जाते हैं, तो इस रंग से बचना ही सही माना जाता है। इसके बजाय आप अन्य शुभ रंगों के कपड़े पहनकर मंदिर में पूजा करेंगे, तो शुभ फलों की प्राप्ति होगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।