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    सौर नववर्ष का आगाज: मेष राशि में सूर्य का प्रवेश, इन 4 राशियों के लिए खुलेगा किस्मत का दरवाजा

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 08:29 PM (IST)

    सिमडेगा के आचार्य पद्मराज ज्योतिष गुरुकुल के डॉ. पद्मराज स्वामी ने सौर नववर्ष पर जानकारी दी। 13 अप्रैल को सूर्य ने मेष राशि में प्रवेश किया, जिससे मेष ...और पढ़ें

    आचार्य पद्मराज

    आचार्य पद्मराज

    HighLights

    1. सूर्य का 13 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश हुआ।

    2. मेष संक्रांति से सौर नववर्ष का शुभ आरंभ।

    3. मिथुन, कर्क, वृश्चिक, कुंभ के लिए शुभ फलदायी।

    संवाद सूत्र, सिमडेगा। टुकुपानी स्थित आचार्य पद्मराज ज्योतिष गुरुकुल के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. पद्मराज स्वामी ने सौर नववर्ष के आगमन पर विशेष जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल को प्रातः 8:50 बजे सूर्यदेव मीन राशि की अपनी यात्रा पूरी कर मेष राशि में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्यदेव अब अगले एक माह यानी 14 मई तक मेष राशि में ही विराजमान रहेंगे। 
     

    मेष संक्रांति: समय चक्र का नया आरंभ 

    आचार्य स्वामी के अनुसार, सूर्य के इस राशि परिवर्तन को 'मेष संक्रांति' या 'बैसाख संक्रांति' के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में मेष को पहली और मीन को अंतिम राशि माना गया है। 
     
    सूर्य जब 12 राशियों की अपनी वार्षिक यात्रा पूर्ण कर पुनः मेष में प्रवेश करते हैं, तो इसी बिंदु से सौर नववर्ष का शुभारंभ होता है। उन्होंने कहा कि यह गणना पूरी तरह से प्राकृतिक और वैज्ञानिक आधार पर टिकी है, क्योंकि संपूर्ण समय चक्र सूर्य की गति के इर्द-गिर्द ही घूमता है।
     

    सांस्कृतिक महत्व और परंपराएं

    बैसाख संक्रांति का महत्व वैश्विक स्तर पर है। नेपाल सहित कई एशियाई देशों में इस दिन को आधिकारिक नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। भारत में भी इसकी सांस्कृतिक जड़ें बहुत गहरी हैं। 
     
    पंजाब में इसे 'बैसाखी' पर्व के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि जहां विक्रम संवत का प्रारंभ चैत्र शुक्ल पक्ष से चंद्रमा की गणना के आधार पर होता है, वहीं बैसाख संक्रांति शुद्ध रूप से सूर्य गणना पर आधारित है।
     

    इन राशियों के लिए शुभ और विशेष आयोजन

    ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, इस बार सूर्य का मेष राशि में गोचर मिथुन, कर्क, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ फलदायी रहने वाला है। सूर्य को स्वास्थ्य और मंगल को साहस का प्रतीक माना जाता है, जिससे इन राशियों के जातकों के जीवन में ऊर्जा और उन्नति का संचार होगा। 

    इस पावन अवसर पर, आचार्य पद्मराज ज्योतिष गुरुकुल के सभागार में मंगलवार अपराह्न 4 बजे से सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें नववर्ष की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाएगी।