यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 16, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विचार एक बहुत ही शक्तिशाली ऊर्जा है
विचार एक ऊर्जा (एनर्जी) है, जो मनुष्य के अंत:करण में प्रकट होती है। जिस प्रकार मन के विकार से काम, क्रोध, लोभ आदि मनोवेग पैदा होते हैं, उसी प्रकार मन ...और पढ़ें

विचार एक ऊर्जा (एनर्जी) है, जो मनुष्य के अंत:करण में प्रकट होती है। जिस प्रकार मन के विकार से काम, क्रोध, लोभ आदि मनोवेग पैदा होते हैं, उसी प्रकार मन के विकार से विचार भी पैदा होता है। अभी तक हम विचार को भाव समझते रहे हैं, जिसका कोई अर्थ नहीं माना जाता था।
हम यही समझते थे कि हवा के झोकों की तरह कुछ बात मन में उठती है और सागर की लहर की तरह विलीन हो जाती है। अब तक सागर की लहर को भी ऊर्जा नहीं माना जाता था, लेकिन अब यह बात सिद्ध हो चुकी है कि सागर की लहर में अपार ऊर्जा है। विचार मन का वेग है। जिस प्रकार काम, क्रोध के वेग से मनुष्य का व्यक्तित्व प्रभावित होता है, उसी प्रकार विचार के वेग से मनुष्य का संपूर्ण व्यक्तित्व प्रभावित होता है, लेकिन हमें उसका अनुभव नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसी संवेदनशीलता अभी तक हमने पैदा नहीं की है।
हमारा सेंस ऑर्गेन इतना संवेदनशील नहीं है कि विचार की उत्पत्ति के मूल स्रोत को जान सकें। इसलिए हमें पता नहीं चलता कि मन में विचार कहां से उत्पन्न होता है और कहां चला जाता है। विज्ञान अब पूरी तरह मानने लगा है कि विचार एक ऊर्जा है और बहुत ही शक्तिशाली ऊर्जा है। यह वेगवान भी है जो किसी भी वस्तु को आसानी से प्रभावित कर सकता है। पदार्थ एक स्थूल वस्तु है और विचार एक अतिसूक्ष्म ऊर्जा। इसीलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे अदृश्य और सूक्ष्म ऊर्जा से पदार्थ को आसानी से प्रभावित किया जा सकता है। हाल ही में रूस के वैज्ञानिकों ने प्रयोग करके सिद्ध कर दिया है कि विचार के परमाणु पदार्थ के परमाणु को आसानी से प्रभावित कर देते हैं। विचार के परमाणु में वेग अधिक होता है और पदार्थ का परमाणु किसी स्थूल वस्तु में छिपा रहता है। इसलिए उसमें वेग कम होता है।
शायद इसीलिए आइंस्टीन ने कभी कहा था कि जो पदार्थ तुम देखते हो, वह तरंग है, ऊर्जा है, क्योंकि पदार्थ की अंतिम परिणति ऊर्जा है। पदार्थ से ही ऊर्जा बनती है और ऊर्जा से ही पदार्थ बनता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। विज्ञान कहता है कि ऊर्जा का नाश नहीं किया जा सकता, उसका रूपांतरण हो सकता है। तब तो स्पष्ट हो गया कि काम, क्रोध आदि मन से उत्पन्न विचार पूर्ण रूप से ऊर्जा हैं। वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि विचार से पदार्थ को प्रभावित किया जा सकता है।