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    किचन में इंडक्शन रखने से पहले जान लें ये 4 वास्तु नियम, एक गलती छीन सकती है घर की सुख-शांति

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 07:14 PM (IST)

    आजकल हर आधुनिक रसोई में इंडक्शन का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे गलत दिशा में रखना वास्तु दोष पैदा कर सकता है? वास्तु नियम यहां व ...और पढ़ें

    किचन में इंडक्शन के वास्तु नियम (Image Source: AI-Generated)

    किचन में इंडक्शन के वास्तु नियम (Image Source: AI-Generated)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज के भागदौड़ भरे समय में हमारी रसोई भी काफी हाई-टेक हो गई है। पहले जहां सिर्फ गैस चूल्हे का राज था, वहीं अब 'इंडक्शन कुकटॉप' ने अपनी जगह बना ली है। यह इस्तेमाल में आसान है, सुरक्षित है और सफाई में भी झंझट नहीं होता। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तरह हम गैस चूल्हे को रखने के लिए वास्तु के नियमों का पालन करते हैं, क्या वही नियम इंडक्शन पर भी लागू होते हैं?

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर की ऊर्जा का केंद्र होती है और वहां रखी हर चीज हमारे स्वास्थ्य और समृद्धि पर असर डालती है। अगर आप भी इंडक्शन इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ छोटी मगर जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी रसोई की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं।

    1. सही दिशा का चुनाव (आग्नेय कोण)

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई में अग्नि का स्थान दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East) यानी 'आग्नेय कोण' में होना चाहिए। यह दिशा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। शुक्राचार्य इसके स्वामी हैं और इस पर मंगल देव का भी प्रभाव रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, सुख-समृद्धि के लिए यह स्थान रसोई, बिजली के उपकरणों और जनरेटर आदि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

    चूंकि इंडक्शन गर्मी पैदा करता है और खाना पकाने का माध्यम है, इसलिए इसे रसोई के इसी कोने में रखना सबसे शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।

    2. खाना पकाते समय आपका मुख

    इंडक्शन को इस तरह सेट करें कि खाना बनाते समय आपका चेहरा पूर्व (East) दिशा की ओर हो। माना जाता है कि पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाने से भोजन में सात्विकता आती है और बनाने वाले का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके खाना पकाना वास्तु में तनाव का कारण माना गया है।

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    3. पानी और अग्नि में दूरी

    यह एक बहुत ही सामान्य लेकिन जरूरी नियम है। इंडक्शन (अग्नि तत्व) और सिंक या पीने का पानी (जल तत्व) एक-दूसरे के बिल्कुल बगल में नहीं होने चाहिए। वास्तु के अनुसार, आग और पानी का मेल विरोध पैदा करता है, जिससे घर के सदस्यों के बीच अनबन हो सकती है। इनके बीच कम से कम 2-3 फीट की दूरी जरूर रखें।

    Kitchen vastu

    (Image Source: AI-Generated)

    4. साफ-सफाई और रखरखाव

    गैस चूल्हे पर दाग-धब्बे पड़ना आम है, लेकिन इंडक्शन की कांच जैसी सतह पर गंदगी तुरंत दिखने लगती है। वास्तु कहता है कि गंदा चूल्हा या इंडक्शन दरिद्रता को न्योता देता है। इस्तेमाल के बाद इसे हमेशा साफ रखें। साथ ही, अगर इंडक्शन का कांच कहीं से चटका हुआ है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं या बदल दें, क्योंकि टूटा हुआ सामान नकारात्मक ऊर्जा फैलाता है।

    वास्तु के ये नियम 'वास्तु शास्त्र' के प्राचीन सिद्धांतों और गृह निर्माण के पारंपरिक मानकों पर आधारित हैं, जो पंचतत्वों (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश) के संतुलन पर जोर देते हैं।