कहीं आपके मंदिर में भी तो नहीं हैं गणेश जी की एक से अधिक मूर्तियां? वास्तु दोष से बचने के लिए पढ़ें ये अहम नियम
गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के दौरान वास्तु नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है। घर के मंदिर में भगवान गणेश ...और पढ़ें
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मंदिर में गणेश जी की 1 अधिक मूर्ति रखना शुभ या अशुभ? (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है।
इस दिन लोग अपने-अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा को विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे जीवन में आने वाली बाधाओं से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन घर में भगवान गणेश की प्रतिमा को विराजमान करते समय कई बातों का विशेष ध्यान रखें। कई लोग गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की 2 मूर्तियों को लाकर विराजमान करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, एक मंदिर में एक ही भगवान की एक से अधिक मूर्तियों को नहीं रखना चाहिए। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि भगवान की एक से अधिक मूर्तियों को एक ही मंदिर में क्यों नहीं रखना चाहिए। ऐसे में आइए इस लेख में आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह।
क्यों नहीं खनी चाहिए एक से अधिक मूर्ति
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में लोगों को भगवान गणेश की एक ही मूर्ति विराजमान करनी चाहिए। मान्यता के अनुसार, मंदिर में एक ही मूर्ति को रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, लेकिन गणपति बप्पा की एक से अधिक मूर्ति रखने से ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसकी वजह से पूजा के दौरान एकाग्रता की कमी हो सकती है और मन भटक सकता है। साथ ही परिवार के लोगों को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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ऐसा माना जाता है कि मंदिर में एक ही देवता की एक से अधिक मूर्ति होने से घर की शांति पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से परिवार के लोगों के बीच झगड़े की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए कहा जाता है कि घर में मूर्ति को विराजमान करने से पहले वास्तु शास्त्र में बताए नियमों के बारे में एक बार जरूर जान लें। इससे आपको कोई अशुभ परिणाम प्राप्त नहीं होगा।
गणेश स्थापना के लिए कौन सी दिशा है शुभ?
भगवान गणेश की स्थापना के लिए वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का केंद्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में गणेश जी की स्थापना कर पूजा-अर्चना करें और मोदक समेत आदि चीजों का भोग लगाएं। इससे भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और कामों में आ रही बाधाओं से छुटकारा मिलता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
