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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 15, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    WhatsApp यूजर्स भारत में फैला रहे Anti-vaccine फेक न्यूज, जानें सच

    By Shilpa Srivastava Edited By:
    Updated: Mon, 15 Apr 2019 05:35 PM (IST)

    रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक एंटी-वायरस न्यूज में कुछ सोशल मीडिया पोस्ट भी शामिल हैं इन्हें पश्चिमी इलाकों में ज्यादा फैलाया गया है ...और पढ़ें

    WhatsApp यूजर्स भारत में फैला रहे Anti-vaccine फेक न्यूज, जानें सच
    WhatsApp यूजर्स भारत में फैला रहे Anti-vaccine फेक न्यूज, जानें सच

    नई दिल्ली (टेक डेस्क)। WhatsApp पर फेक न्यूज फैलना सबसे बड़ी परेशानी है। कंपनी इन मुद्दों को लेकर WhatsApp को जागरुक करना चाहते हैं कि भारत में कैसे फेक न्यूज को स्पॉट किया जाएगा। साथ ही कंपनी कई फीचर्स पर भी काम कर रही है जिसमें in-app browser, इमेज सर्च और फ्रीक्वेंटली फॉरवर्डेड लेबल शामिल हैं। इन सब के बीच एक और ऐसी समस्या है जो यूजर्स के बीच तेजी से फैल रही और यह कंपनी के लिए चिंता का कारण है। WhatsApp पर तेजी से एंटी-वैकसीन न्यूज फैल रही है। यह एक फेक न्यूज है।

    द वॉल स्ट्रीट जनरल में दी गई जानकारी के मुताबिक, एंटी-वायरस न्यूज में कुछ सोशल मीडिया पोस्ट भी शामिल हैं, इन्हें पश्चिमी इलाकों में ज्यादा फैलाया गया है। इससे भारत में मीजल्स और रूबेला जैसी बिमारियों को लेकर जो प्रयास किए जा रहे हैं उनके लिए यह फेक न्यूज बाधा बनकर खड़ी हो गई है। इसके चलते मुंबई के कई स्कूल्स ने हेल्थ ऑफिशियल्स को बच्चों को वैकसीनेशन देने से मना कर दिया है। उन्होंने लग रहा है कि वैकसीनेशन से बच्चों को खतरा हो सकता है। वहीं, इस फेक न्यूज के चलते नई दिल्ली में हजारों बच्चों के वैकसीनेशन छूट गए हैं।

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    WhatsApp पर फैल रहे इस फॉरवर्डेड मैसेज में लिखा है कि वैकसीनेशन इस्तेमाल न करें। अपने बच्चों की जिंदगी बचाएं। इस मैसेज को लोकल हेल्थ ऑफिशियल्स को उपलब्ध कराया गया। इस मैसेज में दावा किया गया है कि वैकसीन्स में ऑटिज्म और अन्य डिस्ऑर्डर शामिल हैं। इस मामले को लेकर UNICEF की अधिकारी सोनिया सरकार ने कहा कि WhatsApp पर फैलाई जा रही यह खबर महज एक अफवाह है।

    एंटी वैकसीन न्यूज सबसे पहले अमेरिका के पश्चिमी इलाके में तेजी से फैली थी। आपको बता दें कि एंटी-वैक्सर्स ग्रुप Facebook के क्लोज्ड ग्रुप्स में ऑपरेट करते थे, लेकिन कुछ ही समय पहले Facebook ने इस तरह के ग्रुप्स को जो फेक न्यूज फैलाते हैं, उन्हें हटाने का निर्णय लिया है। इससे पहले Instagram ने भी अपने प्लेटफॉर्म से एंटी-वैकसीन हैशटैग को ब्लॉक कर दिया था।

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