यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Facebook आदिवासी लड़कियों को बनाएगा डिजिटली मजबूत, कंपनी ने शुरू किया यह प्रोग्राम
इस प्रोग्राम के तहत गांव के स्तर पर ये लड़कियों अपने समुदाय को डिजिटली मजबूत कर सकेंगी ...और पढ़ें

नई दिल्ली (टेक डेस्क)। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने आदिवासी लड़कियों के लिए एक नई पहल की है। फेसबुक ने GOAL (Going Online As Leaders) नाम से डिजिटल स्कीलिंग की शुरुआत की है। इस पहल के तहत 5 राज्यों की आदिवासी लड़कियों को डिजिटल स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके तहत गांव के स्तर पर ये लड़कियों अपने समुदाय को डिजिटली मजबूत कर सकेंगी। साथ ही अपने समुदाय के यंग लीडर्स भी बनने में सक्षम होंगे। इससे न सिर्फ ये लड़कियां खुद को और अपने समुदाय को डिजिटली मजबूत बना सकेंगी। बल्कि आर्थिक तंगी के बावजूद खुद को इस क्षेत्र में उपयोगी बनाने में सक्षम होंगी।
पढ़ें फेसबुक की इस पहल की डिटेल्स:
- इस प्रोग्राम के तहत पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्रो, झारखंड, ओडिशा और मध्यख प्रदेश की नई लड़कियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
- इस प्रोग्राम में आदिवासी लड़कियों को डिजिटल लिट्रेसी, लाइफ स्किल्सझ, लीडरशिप और उद्यमिता स्कील्स की जानकारी दी जाएगी। ये प्रोग्राम पूरे 1 वर्ष का होगा।
- ऑन-ग्राउंड ट्रेनर्स के जरिए डिजिटल लिट्रेसी उपलब्धग कराई जाएगी।
- इस प्रोग्राम के तहत लड़कियों को कुछ लोकप्रिय पर्सनैलिटियों से भी मिलवाया जाएगा। 15 दिनों पर फेसबुक या वॉट्सऐप के जरिए बिजनेस, एजुकेशन, हेल्थ, पॉलिटिक्सि जैसे अलग-अलग बैकग्राउंड की 25 लोकप्रिय पर्सनैलिटीज हर 4 लड़कियों को सलाह देंगे। इससे वो इन सभी सेक्टर्स की जानकारी अच्छे से ले पाएंगी।
- यह प्रोग्राम उन लड़कियों के लिए खासतौर से फोकस करेगा जो आर्थिक तंगी के कारण कभी स्कूल नहीं जा पाए हैं।
- इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए लड़की को 18 वर्ष से ज्याकदा होनी चाहिए। साथ ही लड़की को आदिवासी मूव का होना बेहद जरूरी है।
फेसबुक इंडिया, साउथ और सेंट्रल एशिया की पब्लिोक पॉलिसी डायरेक्टकर अंखि दास ने कहा, “सोशल मीडिया ने पिछले कुछ वर्षों महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काफी मजबूती से काम कर रहा है। इतने समय में यह एक मजबूत टूल बनकर सामने आया है। कंपनी को विश्वास है कि यह पहल आने वाले समय में लोगों को रोजगार दिलाने में मदद करेगी। इससे लड़कियों के समुदाय को भी बढ़ावा मिलेगा।”