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    स्मार्टवॉच से सेहत की निगरानी बन रही चिंता का कारण, क्या है वियरेबल्स यूज करने का सही तरीका?

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 02:00 PM (IST)

    फिटनेस टारगेट को पूरा करने से लेकर हर समय सेहत पर नजर रखने तक वियरेबल्स निस्संदेह उपयोगी हैं। लेकिन स्टेप काउंट से चूक जाने, हार्ट रेट या आक्सीजन में ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    ब्रह्मानंद मिश्र, नई दिल्ली। आज के समय में स्मार्टवाच, स्मार्ट रिंग, फिटनेस ट्रैकर जैसे अनेक वियरेबल्स केवल कदमों की संख्या ही नहीं बताते, बल्कि 'मिनी क्लीनिक' के तौर पर हर समय हमारी सेहत पर नजर भी रखते हैं। आप कितने कदम चलते हैं, रात की नींद कैसी रही, ब्लड ऑक्सीजन, तनाव, रिकवरी, वर्कआउट और कार्डियो फिटनेस की स्थिति, सब कुछ इनसे जान सकते हैं। सेहत के प्रति जागरूक वयस्कों और क्रोनिक हेल्थ समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के लिए ये भरोसेमंद मार्गदर्शक हैं, पर हर समय वियरेबल्स के डेटा पर नजर रखना, संभावित लक्षणों और उपचार को लेकर चिंता पालना भी एक मुसीबत है। जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के एक अध्ययन के अनुसार इन आदतों के चलते लोग अब चिंता और अवसाद की गिरफ्त में भी आने लगे हैं।

    इससे तनाव, थकावट और शारीरिक सेहत की समस्याएं बढ़ सकती हैं। कुछ लोग जरूरत नहीं होने पर भी स्मार्टवॉच से ईसीजी मापते हैं। लक्षण नहीं महसूस होने पर भी दिन में कई बार हार्ट रेट चेक करते हैं, इससे एंग्जाइटी होना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं, वियरेबल्स के हेल्थ डेटा के आधार पर कुछ लोग आनलाइन सर्च भी करने लगते हैं या एआई चैटबॉट से सेहत के बारे में जानना चाहते हैं। ऐसे में क्या हेल्पफुल है, क्या हार्मफुल, इसके बीच भेद करना मुश्किल हो जाता है। बीएमजे के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, लोकप्रिय एआई चैटबॉट की मेडिकल सलाह अक्सर 50 प्रतिशत तक गलत होती है।

    बचें तनाव देने वाले अलर्ट्स से

    वियरेबल्स के जिन फीचर्स से आपको घबराहट होती है, उसे कम या पूरी तरह टर्न-ऑफ कर सकते हैं। खासकर जिन्हें पहले से आट्रियल फिब्रिलेशन (अनियमित हृदय धड़कन) की समस्या है, उन्हें ऐसे फीचर के प्रयोग में सतर्क रहना चाहिए। चिकित्सकीय जरूरत नहीं होने पर भी ये अलर्ट्स आपको चिंता में डाल सकते हैं। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कुछ खास तरह की दवाओं के प्रयोग के कारण भी वियरेबल्स सेंसर की एक्यूरेसी प्रभावित हो सकती है, जिससे आपको गलत अलार्म मिल सकता है।

    बार बार डेटा चेक करने से बचें

    अगर हेल्थ डेटा के कारण तनाव महसूस होता है तो बेहतर होगा कि डिवाइस या ऐसे एप को देखना कम कर दें। सप्ताह में एक बार डेटा को चेक करके भी अपनी सेहत का अंदाजा लगा सकते हैं। इससे आप सिंगल डेटा प्वाइंट पर हाइपर फोकस होने से  बच जाएंगे। इसी तरह सुबह सोकर उठने और रात में सोने से पहले हेल्थ डेटा को चेक करने की आदत आपको परेशानी में डाल सकती है। अतिरेक हमेशा नुकसानदेह होता है, डेटा के मामले में भी ऐसा ही है। वियरेबल्स अनगिनत सिग्नल को कैप्चर करते हैं, जिसे न तो हम समझ सकते हैं और न सभी पर विश्वास कर सकते हैं। हमें यह भी पता नहीं है कि डेटा में परिवर्तन के बाद तुरंत क्या करना है, ऐसे में बिना बात तनाव पालना ठीक नहीं है। दिक्कत के समाधान के लिए चिकित्सकीय पेशेवर का रुख करना चाहिए।

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    हेल्थ डेटा में अनेक कारण जिम्मेदार

    स्वस्थ रहने का मतलब हर किसी के लिए अलग-अलग होता है। सेहत के पीछे जीवनशैली से जुड़े अनेक कारक, जैसे भागदौड़, अल्कोहल, लेट भोजन आदि भी जिम्मेदार होते हैं। किसी असामान्य सिंगल स्कोर पर विश्वास करने के बजाय रिकवरी और नींद के पैटर्न में होने वाले बदलाव पर ध्यान रखना चाहिए। हमेशा ध्यान रखें कि स्मार्टवॉच कितनी भी स्मार्ट हो जाए, वह डॉक्टर की जगह नहीं ले सकती।

    इसे पर्सनल वेलनेस डिवाइस ही मानें

    अधिकांश कंज्यूमर वियरेबल्स पर्सनल वेलनेस डिवाइस के तौर पर ही डेवलप किए जाते हैं। इनकी तुलना मेडिकल ग्रेड डिवाइसेज से नहीं हो सकती। वियरेबल्स का प्रयोग हार्ट रेट, रिदम, ब्लड ऑक्सीजन, तनाव, स्लीप और फिजिकल एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए करना चाहिए न कि अंतिम सत्य के रूप में। हालांकि, कुछ वियरेबल्स में मेडिकल ग्रेड सेंसर, साफ्टवेयर और एल्गोरिदम आ रहे हैं, जिनसे हार्ट रिदम, हाइपरटेंशन और स्लीप एप्निया का प्रबंधन कहीं बेहतर हुआ है।

    वियरेबल्स का करें सही इस्तेमाल

    वियरेबल्स हार्ट रेट, कैलोरी बर्न, स्लीप स्कोर और स्टेप काउंट आदि उपयोगी जानकारियां देते हैं। ये मीट्रिक्स दिनभर बदलते रहते हैं। इन पर अत्यधिक ध्यान देने से आपको तनाव हो सकता है। बार-बार डेटा चेक करने से इन पर हाइपरविजिलेंस बढ़ता है। हार्ट रेट के थोड़ा बढ़ने को बीमारी के संकेत के रूप में नहीं समझना चाहिए। इससे एक चक्र बन सकता है जहां व्यक्ति बार-बार डिवाइस चेक करता है। 'फीडबैक लूप' में घबराहट के कारण दिल की धड़कन और तेज हो जाती है, जिससे बार-बार जांच करने की इच्छा होती है। कुछ लोग थकान होने पर भी अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए खुद पर जोर डालते हैं और पूरा नहीं होने पर खुद को दोषी महसूस करते हैं। वियरेबल्स डेटा की पल-पल की पुष्टि के बजाय ट्रेंड समझने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। डेटा को तय समय पर देखें, सुबह बहुत जल्दी या रात में देर से चेक करने से बचें। लंबे समय के पैटर्न पर ध्यान दें। इन जानकारियों का उपयोग बेहतर नींद या अधिक सक्रियता के लिए करना चाहिए, न कि परफेक्ट स्कोर पाने के लिए। अनावश्यक अलर्ट बंद कर दें और अपने शरीर के संकेतों जैसे ऊर्जा, मूड और आराम को भी महत्व दें, ताकि जागरूकता बढ़े और अपने शरीर पर भरोसा बना रहे।

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    डा. ऋतिका अग्रवाल, कंसल्टेंट साइकोलाजिस्ट, जसलोक अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर, मुंबई

    कैसे प्रयोग करें वियरेबल हेल्थ डेटा

    1. स्टेप काउंट और एक्टिविटी : अक्सर सुनते हैं कि प्रतिदिन 10 हजार कदम पैदल चलना जरूरी है। अगर यह संभव नहीं है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। वर्ष 2025 की एक मेटा एनालिसिस के मुताबिक सेहतमंद रहने के लिए सात हजार कदम भी पर्याप्त होते हैं। हमारा फोकस सक्रियता पर होना चाहिए। थोड़ा टहलना भी बैठे रहने से बेहतर है।

    रेड फ्लैग : अगर चलते समय जोड़ों में दर्द, संतुलन बनाने में परेशानी हो रही है तो डाक्टर से मिलना चाहिए।

    2. वर्कआउट और कार्डियो फिटनेस (वीओ2 मैक्स)

    वीओ2 मैक्स दर्शाता है कि शरीर अधिकतम कितना ऑक्सीजन ग्रहण और इस्तेमाल कर सकता है। वर्कआउट के दौरान वियरेबल इसकी गणना करने के लिए एक्सेलेरोमीटर, हार्ट रेट और जीपीएस का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही उम्र, लिंग और वजन जैसी दी गई जानकारियों का भी उपयोग करते हैं। अधिक मात्रा दर्शाती है कि दिल और फेफड़े बेहतर ढंग से काम कर रहे हैं और आप शारीरिक रूप से फिट हैं।

    रेड फ्लैग : अगर ट्रैकर लगातार कम नंबर दिखा रहा है, वजन अधिक है, जल्दी थकान लगती है तो यह कार्डियोवैस्कुलर खतरे का संकेत हो सकता है। हार्ट हेल्थ के लिए डॉक्टर से मिलना चाहिए।

    3. हार्ट रेट : वियरेबल्स पीपीजी (फोटोप्लेथिस्मोग्राफी) तकनीक का प्रयोग करके त्वचा पर हरी एलईडी रोशनी डालते हैं। जब खून पंप होता है तो रोशनी के सोखने में आए अंतर को माप कर प्रति मिनट धड़कनों की गिनती करते हैं। सामान्य वयस्क में आराम की स्थिति में हार्ट रेट 60 से 100 (बीट्स प्रति मिनट) के बीच होता है। कम रेट बेहतर सेहत का संकेत है। महिलाओं की रेस्टिंग हार्ट रेट थोड़ी अधिक होती है और बच्चों की 100 से अधिक हो सकती है। अगर हार्ट रेट लगातार बहुत अधिक, कम या अनियमित बनी रहती है तो कुछ वियरेबल्स अलर्ट करते हैं। व्यायाम के दौरान इसमें वृद्धि होती है।

    रेड फ्लैग : अगर हार्ट रेट 100 बीपीएम से अधिक बनी रहती है और व्यायाम के बाद सामान्य होने में काफी समय लगता है तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।

    4. स्लीप : कुछ ट्रैकर्स का प्रयोग नींद के आकलन के लिए किया जाता है। वहीं, कुछ ट्रैकर्स अनेक पैमानों पर नींद के पैटर्न की पहचान करते हैं। एक्सेलरेटर और पीपीजी शरीर की गतिविधि और दिल की धड़कन का पैटर्न का पता कर वियरेबल एल्गोरिदम बनाते हैं जिससे गहरी नींद, हल्की नींद या रैम स्लीप का अनुमान लगता है। कुछ सांस लेने के पैटर्न और ब्लड ऑक्सीजन स्तर को भी ट्रैक करते हैं। एआई और डेटा सेट बेहतर होने के साथ नींद की गुणवत्ता की सटीक जानकारी मिलने लगी है।

    रेड फ्लैग : अगर ट्रैकर रात में नींद टूटने या सांस लेने में दिक्कत को दर्शाता है, पूरी नींद लेने के बाद भी आप थकान महसूस करते हैं और सोते समय आक्सीजन का स्तर कम रहता है, तो डॉक्टर से मिलकर 'स्लीप टेस्टिंग' करानी चाहिए।

    5. ब्लड ऑक्सीजन (एसपीओ2): वियरेबल एसपीओ2 की गणना करने के लिए एलईडी का इस्तेमाल करते हैं। खून में ऑक्सीजन का स्तर यह बताता है कि फेफड़े आपके खून में कितनी ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। यह गणना वे इस आधार पर करते हैं कि खून लाल और इन्फ्रारेड रोशनी को किस तरह सोखता और परावर्तित करता है। एक रीडिंग से अधिक जानकारी नहीं मिलती, लेकिन कोई पैटर्न दिखता है, तो यह उपयोगी डेटा हो सकता है। हालांकि, यह मेडिकल ग्रेड पल्स ऑक्सीमीटर जितना एक्यूरेट नहीं होता, लेकिन बेस लाइन ब्लड ऑक्सीजन का स्तर बता सकता है ताकि आप डॉक्टर से सलाह ले सकें।

    रेड फ्लैग : अगर आपकी ब्लड ऑक्सीजन लगातार 95 से कम रहता है, साथ सांस लेने में कठिन, होंठ या नाखूने नीले रंग के हो जाते हैं तो डॉक्टर तुरंत मिलना चाहिए।

    6. तनाव : वियरेबल टेक्नोलॉजी अब तनाव और रिकवरी की शारीरिक स्थितियों का आकलन भी कर रही है। एडवांस ट्रैकर हार्ट रेट, उसमें बदलाव और अन्य मानकों के आधार पर स्ट्रेस और रेस्ट मोड को चिह्नित करते हैं। अगर आप तनावग्रस्त होते हैं तो यह अलर्ट करेगा, इससे आप लंबी गहरी सांस ले सकते हैं। हालांकि, इससे यह पता नहीं चलता है कि तनाव का कारण क्या है, यह गलत है या सही।

    रेड फ्लैग : अगर आपकी डिवाइस आपको लगातार तनाव में दिखा रही है, तो इसके कारणों के बारे में जानना आवश्यक है। इसके लिए डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

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