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    इंटरनेट सेफ्टी टिप्स: अपने डिजिटल फुटप्रिंट और ऑनलाइन डेटा की कैसे करें सुरक्षा?

    By Brahmanand MishraEdited By: Subhash Gariya
    Updated: Thu, 05 Feb 2026 08:00 PM (IST)

    इंटरनेट आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ा है। यह लेख डिजिटल फुटप्रिंट को नियंत्रित करने, डेटा के महत्व ...और पढ़ें

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    टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। तथ्यों के साथ आंकड़ों को जानना हो या सूचना के साथ ज्ञान अर्जित करना हो या फिर निजी, सामाजिक और आर्थिक तरक्की का कोई माध्यम तलाशना हो, इंटरनेट पर ही हम सबसे अधिक भरोसा करने लगे हैं। या कहें हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए इंटरनेट मॉडर्न लाइफ का अहम हिस्सा बना चुका है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तो अब सीखने, संवाद करने, नए विचार और सूचनाओं के लिए अधिक उपयोगी साबित हो रहा है। हालांकि, इन सभी खूबियों के बीच यह भी समझने की जरूरत है कि ऑनलाइन अकाउंट और डिवाइसेज की अधिकता हमारे साइबर अपराधों के जाल में फंसने की आशंका को भी बढ़ाती है।

    ऐसे में जरूरी है कि इंटरनेट के सुरक्षा नियमों को लेकर जागरूक बनें, ताकि हमारे डेटा और डिवाइसेज सुरक्षित रहें। रिमोट वर्क के बढ़ते चलन, क्लाउड सर्विसेज, AI आधारित टूल्स और प्लेटफार्म इंटीग्रेशन के इस दौर में डेटा फुटप्रिंट्स को लेकर अब अधिक सतर्क और सक्रिय होने की आ‍वश्यकता है।

    इसका कारण है कि डिजिटल बदलाव के साथ प्राइवेसी का खतरा भी सामानांतर तेज गति से बढ़ रहा है। साइबर दुनिया की एक छोटी सी घटना न केवल व्यापक स्तर पर कामकाज को ठप कर सकती है बल्कि इससे विश्वास, प्रतिष्ठा और वित्तीय नुकसान भी होता है, जिसे बनाने में वर्षों का समय लग जाता है।

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    जागरूक और जिम्मेदार बनने की जरूरत

    ऑनलाइन दुनिया की नई चुनौतियों और मौजूदा चिंताओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष सुरक्षित इंटरनेट दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है-'स्मार्ट टेक, सुरक्षित विकल्प, AI का सुरक्षित और जिम्मेदारी भरा इस्तेमाल। लोगों को जागरूक करने के लिए मुख्य रूप से तीन स्तरों पर प्रयास किया जाता है- यूजर्स को सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ इंटरनेट और AI प्रयोग के लिए प्रेरित करना। दूसरा, साइबर हाइजीन के तरीकों को समझना और तीसरा को लोगों को साइबर खतरों से बचने के तरीकों के बारे में बताना।

    अपने डेटा का समझें महत्व

    जब आप किसी एप या वेबसाइट पर विजिट करते हैं तो आपसे कुछ खास तरह के डेटा का एक्सेस मांगा जाता है। अलग-अलग माध्यमों पर आपके द्वारा साझा किए गए डेटा को आधार बनाकर प्रोफाइल तैयार की जाती है। जब आप इंटरनेट पर कुछ सर्च करते हैं तो इन्हीं जानकारियों के आधार पर विज्ञापन दिखाए जाते हैं।

    डेटा ब्रोकर यूजर्स के निजी जीवन, फाइनेंशियल जानकारियों को भी ऐसे ही एकत्र करते हैं। आयु, लोकेशन, जेंडर जैसे तमाम डेमोग्राफिक डिटेल्स को दूसरे डेटा प्वाइंट्स के साथ मिलाकर ब्रोकर वित्तीय स्थिति, खानपान की आदतों, राजनीतिक सोच, यहां तक कि हेल्थ इन्फार्मेशन का भी अंदाजा लगा सकते हैं। ऐसे में ऑनलाइन मौजूदगी को सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर और हर स्तर पर सतर्क रहने की जरूरत होती है।

    किस तरह का रहता है जोखिम

    जब आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो जाने-अनजाने में कई सारे संभावित ऑनलाइन खतरों की जद में होते हैं। डिजिटल माध्यमों को जैसा हम देखते हैं, यह उससे कहीं अधिक जटिल है। इसमें कुछ तरीके अक्सर चर्चा में रहते हैं जैसे :

    • डेटा सेंध
    • आइडेंटिटी थेफ्ट
    • मालवेयर और वायरस
    • फिशिंग और स्कैम ईमेल
    • फेक वेबसाइट
    • फॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग
    • साइबर बुलिंग

    अपने डिजिटल फुटप्रिंट्स को करें नियंत्रित

    • किसी ऑनलाइन सर्विस का प्रयोग करने से पहले उसके नियम-शर्तों को जानें।
    • मार्केटिंग ऑप्ट-इन और लॉयल्टी प्रोग्राम को स्पष्ट तौर पर दूर रहने का प्रयास करें।
    • एप्स को डाउनलोड करने और उसकी परमिशन को लेकर हमेशा सतर्क रहें।
    • इंटरनेट मीडिया और पब्लिक फोरम पर कुछ भी साझा करने से पहले विचार करें।
    • अच्छे एंटीवायरस साफ्टवेयर का प्रयोग करें, ताकि साइबर सुरक्षित रह सकें।

    इंटरनेट सेफ्टी के कुछ जरूरी टिप्स

    1. सुरक्षित हो इंटरनेट कनेक्शन :

    पब्लिक वाई-फाई का प्रयोग करने के दौरान संवेदनशील और वित्तीय जानकारियों जैसे ऑनलाइन बैंकिंग या ऑनलाइन शापिंग आदि करने से बचना चाहिए। पर्सनल ट्रांजैक्शन हमेशा सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन पर ही करना बेहतर होता है।

    2. ओएस और साफ्टवेयर रखें अपडेट :

    हमेशा आपरेटिंग सिस्टम और एप्स के नवीनतम वर्जन का ही प्रयोग करना चाहिए। इससे सिक्योरिटी पैचेज का लाभ मिलता है। खासकर, पेमेंट, हेल्थ या संवेदनशील जानकारियों वाले एप को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।

    3. प्राइवेसी सेटिंग को जांचें :

    किसी वेबसाइट और एप का प्रयोग करने के दौरान उसकी प्राइवेसी पालिसी को जानना चाहिए कि कैसे आपके डेटा को कलेक्ट और एनलाइज किया जाता है। ध्यान रखें कि भले ही आपकी सेटिंग प्राइवेट हो, ऑनलाइन माध्यम पर बहुत ही कम डेटा प्राइवेट रह पाता है।

    4. संदिग्ध लिंक को लेकर सतर्कता :

    अनजान स्रोत से आने वाले लिंक्स, स्पैम ईमेल, ऑनलाइन क्विज, क्लिकबेट, फ्री ऑफर्स या अनचाहे विज्ञापन पर क्लिक करने से बचना चाहिए।

    5. प्रयोग में नहीं आने वाले अकाउंट बंद करें :

    कई सारे अकाउंट नियमित रूप से प्रयोग में नहीं आते हैं, इससे पासवर्ड और डेटा में सेंध का जोखिम बढ़ जाता है। पुराने अकाउंट को बंद कराने के साथ-साथ थर्ड पार्टी सर्वर से डेटा को डिलीट की रिक्वेस्ट करनी चाहिए।

    6. साझा करने से पहले सोचें :

    ऑनलाइन साझा किए गए कंटेंट को हटाने के बाद भी उसकी कॉपी मौजूद रह सकती है। ऐसे में संवेदनशील जानकारियों को साझा करने से बचना चाहिए।

    7. जरूरी है मल्टीफैक्टर ऑथेंटिकेशन :

    ओटीपी, पर्सनल सिक्योरिटी क्वेश्चन या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन जैसे उपायों से अकाउंट अधिक सुरक्षित होता है। इसी तरह पासवर्ड को जटिल बनाना चाहिए, ताकि आसानी से सेंध न लग सके।

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