यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 01, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इंटरनेट शटडाउन के सबसे ज्यादा मामले भारत में, 2022 में 84 बार ठप हुई सर्विस: रिपोर्ट
इंटरनेट सर्विस बाधित होने को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में भारत इंटरनेट सर्विस बाधित होने के मामले में सबसे आगे रहा। ...और पढ़ें

नई दिल्ली, एजेंसी। भारत इस बार भी इंटरनेट सर्विस ठप होने की कड़ी में ग्लोबल रैंकिंग में पहले स्थान पर रहा है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक भारत में बीते साल 2022 में कुल 84 बार इंटरनेट शटडाउन हुआ। यही नहीं, इसके साथ ही यह लगातार पांचवी बार था जब दुनिया भर में भारत का नाम इंटरनेट शटडाउन होने की कड़ी में सबसे पहले नंबर पर रहा।
इससे पहले भी लगातार चार सालों तक भारत में इंटरनेट की परेशानी सबसे ज्यादा झेली गई। रिपोर्ट्स की मानें तो, बीते साल इंटरनेट शटडाउन होने के कुल 187 मामले सामने आए। इनमें 84 मामले भारत से रहे।
इंटरनेट शटडाउन के अधिकतर मामले कश्मीर से रहे
भारत में अधिकतर मामले कश्मीर से रहे। इंटरनेट शटडाउन होने की घटनाओं की वजहें राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा सामने आई हैं।

कश्मीर की बात करें तो, बीते साल के शुरुआती महीने जनवरी और फरवरी में तीन दिन के लंबे कर्फ्यू की वजह से इंटरनेट सर्विस बंद रही।
2017 के बाद पहली बार रिकॉर्ड हुए 100 से कम मामले
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2017 के बाद पहली बार इंटरनेट शटडाउन के मामले 100 से कम रहे हैं। इस लिस्ट में भारत के बाद यूक्रेन का नाम सामने आया है। इसकी वजह रूस- यूक्रेन वॉर रहा।
मालूम हो कि बीते साल 2022 में 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, जिसके बाद कम से कम 22 बार ऐसे मामले रिकॉर्ड हुए जब रूसी सेना ने इंटरनेट का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया।
यूक्रेन के बाद लिस्ट में तीसरे नंबर पर ईरान का नाम
यूक्रेन के बाद इस लिस्ट में ईरान का नाम सामने आया है। ईरान में बीते साल 2022 में 18 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें इंटरनेट की सर्विस ठप रही। दरअसल, ईरान में बीते साल शांति बनाए रखने के लिए इंटरनेट सर्विस बंद रही। 16 सितंबर को एक 22 वर्षीय ईरानी महिला की पुलिस हिरासत में रहते हुए मौत हो गई थी।
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ईरानी महिला को हिजाब नियमों का उल्लंघन करने के लिए हिरासत में रखा गया था। महिला की मौत के बाद देश में स्थिति बिगड़ी और ईरान में राष्ट्रव्यापी सरकार विरोधी विरोध शुरू हो गया था।