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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 07, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    विदेश भेजा जाता है भारत का डेटा, देश की टेक कंपनियों पर भरोसा करने की जरूरत- भाविश अग्रवाल

    By Agency Edited By: Yogesh Singh
    Updated: Sun, 07 Jul 2024 09:30 PM (GMT+05:30)

    इंटरव्यू में अग्रवाल ने इसकी तुलना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया से की। उन्होंने कहा कि जैसे ब्रिटिश कंपनियां भारतीय संसाधनों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती ...और पढ़ें

    यूजर्स को भारत की टेक कंपनियों पर भरोसा करने की जरूरत है।
    यूजर्स को भारत की टेक कंपनियों पर भरोसा करने की जरूरत है।

    HighLights

    1. इंटरव्यू में भाविश अग्रवाल ने टेक्नो-उपनिवेशवाद शब्द का इस्तेमाल किया।
    2. इन्होंने कहा भारत का डेटा विदेश भेजा जाता है, जिसका इस्तेमाल कंपनियां करती हैं।
    3. यूजर्स को देश की टेक कंपनियों पर भरोसा करना चाहिए।

    एएनआई, नई दिल्ली। कैब सर्विस प्रोवाइड कराने वाली कंपनी ओला के को-फाउंडर भाविश अग्रवाल ने एएनआई के साथ एक इंटरव्यू में टेक्नो-उपनिवेशवाद शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि भारत में टेक्नोलॉजी को खूब तरजीह दी जाती है।

    बहुत सारे ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जो यूजर्स से उनके ऐप या सर्विस को एक्सेस करने के लिए डेटा मांगते हैं। डेटा लेने के बाद उसे विदेश भेजा जाता है और प्रोसेस करके फिर से उसे भारत में वापस भेज दिया जाता है। ऐसा बड़े स्तर पर किया जा रहा है।

    अपने फायदे के लिए होता है इस्तेमाल

    इंटरव्यू में अग्रवाल ने इसकी तुलना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया से की। उन्होंने कहा कि जैसे ब्रिटिश कंपनियां भारतीय संसाधनों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती थीं। ठीक, वैसे ही आज के समय में विदेशी कंपनियों के द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में किसी ऐप के यूजर्स की संख्या करोड़ों में है। इसी का फायदा उठाकर ये कंपनियां डेटा को ले लेती हैं। जिसके बाद डेटा का लाभ बड़े पैमाने पर विदेशी तकनीकी दिग्गजों द्वारा अपने फायदे के लिए किया जाता है।

    विदेशी टेक कंपनियों के पास भारतीय डेटा

    अग्रवाल ने तर्क दिया कि इसमें से केवल दसवां हिस्सा (डेटा) भारत में स्टोर किया जाता है। नब्बे प्रतिशत वैश्विक डेटा केंद्रों को निर्यात किया जाता है, जो बड़े पैमाने पर बड़ी टेक कंपनियों के स्वामित्व में हैं। इसे एआई में संसोधित किया जाता है, भारत में वापस लाया जाता है और हमें डॉलर में बेचा जाता है।

    हमें ऐसा सिस्टम बनाने की जरूरत है कि जिससे हमारा डेटा हमारे पास ही रहे। हम 20 प्रतिशत डेटा का उत्पादन करते हैं। यानी, दुनिया में किसी भी चीज के यूजर होते हैं तो उनकी संख्या भारत में ही सबसे अधिक होती है।

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    एआई की दुनिया में बनाएं अपना वर्चस्व

    इन्होंने कहा कि भारत एआई के क्षेत्र में बहुत बड़ा कर सकता है। हम भारतीयों के रूप में AI की दुनिया में अपनी ताकत का इस्तेमाल करें तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। ऐसा करने के लिए हमें और ज्यादा डेटा का प्रोडक्शन करना चाहिए। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारा डेटा हमारे पास ही रहे।

    अग्रवाल का मानना ​​है कि AI की दुनिया में डेटा ही मूल है और इसका स्वामित्व डेटा निर्माता के पास ही होना चाहिए। आगे इन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए कृत्रिम जैसी कंपनियों का इस्तेमाल करना चाहिए, जो भारती भाषाओं में सर्विस पेश करती हैं।

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