आगरा में नियमों की अनदेखी, ताज क्षेत्र में काट डाले काटे 43 पेड़; भूखंड मालिक पर दर्ज हुआ मुकदमा
आगरा के ताज ट्रेपेजियम जोन में नियमों की अनदेखी कर 43 पेड़ काट दिए गए। वन विभाग की शिकायत पर ...और पढ़ें
-1788736075938_m.webp)
प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
ताज ट्रेपेजियम जोन में 43 पेड़ अवैध रूप से काटे।
भूखंड मालिक महेंद्र सिंघानिया पर वन विभाग ने केस किया।
वन और वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू।
जागरण संवाददाता, आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन में सख्त नियमों के बाद भी बिना अनुमति के पेड़ काटे जा रहे हैं। शुक्रवार को एक भूखंड में 43 पेड़ काट दिए गए। भूखंड मालिक ने कहा कि मेरी जमीन चाहे जो करूं। वन विभाग की टीम ने जांच के बाद शनिवार को सिकंदरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। अरतौनी-अकबरा रोड पर महेंद्र सिंघानिया का प्लाट है।
शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने वन विभाग से प्लाट में पेड़ों के काटे जाने की शिकायत की। वन रक्षक अखिलेश और उनके साथी शिवनारायण जांच को मौके पर पहुंचे तो वहां 39 विलायती बबूल, दो पापड़ी, एक छेकुर और एक देसी बबूल का पेड़ कटा मिला। वन विभाग से अनुमति लिए बिना 43 हरे पेड़ों पर आरी चलवा दी गई।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया पूछताछ में महेंद्र ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने अनुमति नहीं ली थी। उसने यह भी कहा कि भूमि मेरी है। इसमें चाहे मैं कुछ भी करूं, इसके लिए मैं स्वयं उत्तरदायी हूं। अब जो नियमानुसार उचित होगा, उसका भुगतान किया जाएगा। शनिवार को थाना सिकंदरा में वन अधिनियम और उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के तहत मामला दर्ज किया गया।
सामाजिक वानिकी के डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि कोई बड़ा पेड़ नहीं काटा गया है। सिर्फ छोटे पौधे काटे गए। जांच जारी है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सिकंदरा प्रभारी निरीक्षक राजीव त्यागी ने बताया वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद आरोपित पर कार्रवाई की जाएगी।
ये कहता है नियम
ताजमहल के पांच किलोमीटर के दायरे में हरे पेड़ काटने या छांटने की अनुमति केवल सुप्रीम कोर्ट से मिलती है। नए निर्देश के अनुसार अधिकांश मामलों में सीईसी या डीएफओ की लिखित अनुमति जरूरी है। उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा चार के अनुसार किसी भी तरह की जमीन पर खड़ा पेड़ बिना अनुमति के काटना मना है।
अनुमति मिलने पर भी काटे गए पेड़ के बदले नए पौधे लगाने का नियम है। बिना अनुमति काटने पर मुकदमा के साथ जुर्माना भी हो सकता है। टीटीजेड में प्रति पेड़ एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। काटे गए एक पेड़ के बदले 10 गुणा पौधे रोपण कराने के साथ पांच वर्ष तक पौधों की देखरेख का खर्च भी उठाने का नियम है।
