आगरा कैंट: मर्यादा...अनुशासन...कानून, सब एक पल में तार-तार; आखिर वर्दी वाले क्यों भूल गए पद की गरिमा
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ जवानों ने एक वरिष्ठ अधिकारी से मारपीट कर वर्दी की गरिमा को तार-तार कर दिया। इस घटना से पूरे देश में सुर्खियां बनी हैं ...और पढ़ें

आगरा कैंट पर स्टेशन निदेशक संतोष त्रिपाठी से लिपटकर बचाने की गुहार लगाते डिप्टी एसएस नरेंद्र चाहर। वीडियो ग्रैब
प्रतीक गुप्ता, आगरा। मर्यादा, अनुशासन, कानून, सब एक पल में तार-तार। वर्दी धारण किए हुए आरपीएफ के जवान एक झटके में खाकी की गरिमा भूल गए। सुरक्षा सेवाओं में चयनित होने वाले हर जवान को सबसे पहले पाठ ही अनुशासन का पढ़ाया जाता है। कर्तव्य की शपथ के साथ मर्यादा भी सिखाई जाती है। चाहे कुछ हो जाए...उच्च पद पर आसीन अधिकारी के आदेश का पालन करना ही फर्ज है।
कानून के दायरे में रहना ही है। तन पर वर्दी धारण करने के साथ नियम रूपी ये वचन भी मन में अपने आप ही हर जवान में मन में वास कर जाते हैं। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफकर्मी पलभर में सब भूल गए और अधिकारी से मारपीट कर डाली।
मारपीट ही नहीं, प्लेटफार्म पर घसीटते हुए अधिकारी का जुलूस तक निकाल डाला। जांच कमेटी की रिपोर्ट में शायद इस घटना के पीछे छिपा कोई अलग सच भी सामने आए। बहरहाल, आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर हुई यह घटना पूरे देश में सुर्खियों में छाई हुई है। सवाल ये उठ रहा है कि आरपीएफ जवान, जब एक रेलवे अधिकारी के साथ ऐसा कर सकते हैं तो साधारण यात्रियों के साथ इनका बर्ताव कैसा होगा?
मारपीट की घटना से जुड़ा एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र सिंह चाहर, आरपीएफ जवानों के गुस्से से बचने के लिए स्टेशन निदेशक संतोष कुमार त्रिपाठी से चिपट जाते हैं, गुहार लगाते हैं...सर मुझे बचाइए। संतोष कुमार त्रिपाठी, भड़के हुए जवानों को रोकने का प्रयास करते हुए वीडियो में नजर आ रहे हैं।
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लेकिन जवानों के सिर पर तो गुस्से का ऐसा भूत सवार था कि वे एक नहीं सुनते और नरेंद्र सिंह चाहर को फिर खींचने लगते हैं। इस खींचतान में नरेंद्र सिंह चाहर के साथ संतोष त्रिपाठी भी खिंचे चले जाते हैं।
जबकि पद के अनुसार देखा जाए तो संतोष त्रिपाठी आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के सर्वोच्च अधिकारी हैं। जवानों ने उनकी बात को भी नजरअंदाज कर दिया। किसी और की कही-सुनी बात पर विश्वास न किया जाए और स्टेशन प्लेटफार्म पर हुई इस घटना में अब तक वायरल हो चुके तमाम वीडियो को ही आधार बनाया जाए तो प्रथम दृष्टया तो आरपीएफ जवानों की ही गलती नजर आती है।
हालांकि इसे हीराकुंड एक्सप्रेस में चेन पुलिंग के बाद उपजा विवाद ठहराया जा रहा है। लेकिन चेन पुलिंग के मामले तो रोजाना ही स्टेशन पर होते हैं। सिर्फ एक इसी छोटी सी घटना को लेकर स्टेशन पर स्टाफ के बीच मर्यादाएं नहीं टूट सकतीं।
परदे के पीछे कोई ऐसा कारण भी सामने आएगा, जिसमें यह हो सकता है कि आपस में शोले पहले से भड़क रहे हों और चेन पुलिंग की आड़ में ये एक बड़े धमाके का रूप ले गए। इधर मारपीट के घटना के बाद स्टेशन पर रेल कर्मचारियों ने सोमवार को दिनभर काली पट्टी बांधकर काम किया। शाम को रेलवे यूूनियन के बैनर तले बैठक भी हुई।