साहब...मैं अभी जिंदा हूं, जमीन के लिए जिंदा ठहरा दिया मुर्दा; 38 साल बाद गांव लौटे परसादी खा रहे दर-दर की ठोकरें
आगरा में 38 साल बाद घर लौटे परसादी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उनकी पुश्तैनी जमीन हड़प ली गई है। उन्होंने तहसीलदार से न्याय की गुहार लगाई, जिन् ...और पढ़ें

AI जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।
मुन्नालाल शर्मा, फतेहाबाद (आगरा)। सम्पूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विल्लोचपुरा, ताजगंज निवासी परसादी पुत्र रघुवर 38 वर्ष बाद घर लौटे और तहसीलदार शिखर मिश्रा के सामने फरियाद लगाई कि वह जीवित हैं, लेकिन सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत घोषित कर उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि पर वारिसी दर्ज कर दी गई।
परसादी ने प्रार्थना पत्र में बताया कि मौजा सारंगपुर स्थित गाटा संख्या 165 रकबा 2.0670 हेक्टेयर और गाटा संख्या 91 रकबा 1.5090 हेक्टेयर में वह सहखातेदार हैं। करीब 38 वर्ष पहले पारिवारिक विवाद के चलते वह घर छोड़कर दिल्ली चले गए थे। वहां वर्षों तक सब्जी का ठेला लगाकर जीवनयापन किया। बाद में लुधियाना में भी मेहनत-मजदूरी करते रहे।
जब वापस गांव पहुंचे तो उन्हें पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम समाप्त कर उन्हें मृत दिखा दिया गया है। पीड़ित का आरोप है कि उनके जीवित रहते ही खतौनी से उनका नाम हटाकर वारिसी में तुलाराम और राजवीर के नाम दर्ज करा दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने न तो किसी के पक्ष में वसीयत की और न ही अपनी भूमि का बैनामा किया।
इसके बावजूद उनकी संपत्ति दूसरे लोगों के नाम दर्ज हो गई। परसादी ने आरोप लगाया कि उनकी गैरमौजूदगी का लाभ उठाकर जमीन हड़पने के उद्देश्य से सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, चाहे वे उनके परिजन हों या राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी।
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तहसीलदार शिखर मिश्रा ने प्रार्थना पत्र प्राप्त कर मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि एक जीवित व्यक्ति का नाम राजस्व अभिलेखों से किन परिस्थितियों में हटाया गया और वारिसी किस आधार पर दर्ज की गई।