आठ रुपये के इंट्राकैथ पर MRP 380, यूरिन बैग की कीमत सुन चौंक जाएंगे; हॉस्पिटल्स बनाते हैं ऐसे लंबा बिल
अस्पतालों में भर्ती मरीजों से सर्जिकल सामान जैसे सिरिंज, ग्लव्स पर थोक रेट से 4600% तक अधिक मुनाफा कमाया जा ...और पढ़ें

हॉस्पिटल्स में ज्यादा मरीजों के लिए इंट्राकैथ और यूरिन बैग मंगाया जाता है।
अजय दुबे, आगरा। हॉस्पिटल में एक दिन भर्ती होने के बाद लंबा चौड़ा बिल थमा दिया जाता है। ये बिल कैसे लंबा चौड़ा होता है, इसी की पड़ताल की गई। भर्ती मरीजों के तीमारदारों से मंगवाए जा रहे सिरिंज, ग्लव्स, इंट्राकैथ सहित सर्जिकल सामान की एमआरपी और थोक रेट में 4600 प्रतिशत तक मुनाफा है।
अस्पतालों में स्थित मेडिकल स्टोर से 500 प्रतिशत तक मुनाफे के बाद सर्जिकल सामान मरीजों के तीमारदारों को दिया जा रहा है। इससे इलाज का खर्चा भी बढ़ रहा है। दैनिक जागरण की पड़ताल में सर्जिकल सामान की MRP, थोक रेट और अस्पतालों से बेचे रहे सामान के रेट में बड़ा अंतर मिला। आठ रुपये के थोक रेट वाले इंट्राकैथ पर MRP 380 रुपये (4600 प्रतिशत मुनाफा) तक है।
केस 1
दोपहर तीन बजे आर एंड आर हास्पिटल, सेक्टर चार आवास विकास कालोनी में संचालित आरएस मेडिकल स्टोर के संचालक ने 225 रुपये एमआरपी वाला आइवी सेट 40 रुपये में दिया, 190 रुपये की एमआरपी का इंट्राकैथ 30 रुपये, इसी तरह अन्य सर्जिकल सामान लेने के बाद एक सादा कागज पर बिल बना कर दे दिया।
जब पक्का बिल देने के लिए कहा तो संचालन ने पूछा सही बताओ कहां से आए हो। उसे बताया कि घर पर ड्रेसिंग करानी है।
केस 2
जीवन ज्योति हास्पिटल, सेक्टर वन में संचालित फार्मेसी से 90 रुपये की एमआरपी का ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेट 35 रुपये में दिया, पांच एमएल की सिरिंज पर एमआरपी पांच रुपये थे, दो सिरिंज 10 रुपये की दीं।
इंट्राकैथ पर एमआरपी 90 रुपये थे, 30 रुपये का दिया। बिल बनाने से पहले पूछा भुगतान नकद या आनलाइन। नकद भुगतान करने के लिए कहा, पक्का बिल दे दिया। बिल में एमआरपी, रेट और एसजीएसटी व सीजीएसटी पर शून्य लिखा हुआ था।
केस 3
पुष्पांजलि हास्पिटल में संचालित मेडिकल स्टोर पर सर्जिकल सामान का पर्चा दिया, कर्मचारियों ने पूछा कि मरीज अस्पताल में भर्ती है। उन्हें बताया कि ड्रेसिंग होनी है, कर्मचारियों ने आपस में बात की। इसके बाद सामान निकाल दिया।
380 रुपये का इंट्राकैथ 51.15 रुपये का दिया। यूरोबैग पर एमआरपी 397 रुपये थी, इसे 48.71 रुपये का दिया। बिल में एमआरपी, सेल प्राइज के सा थ जीएसटी पांच प्रतिशत भी लगाया गया। छह रुपये का डिस्काउंट भी दिया।
ICU में एक दिन की दवाएं और सामान का खर्च
जिले में 480 निजी अस्पताल हैं। अस्पताल के अंदर ही मेडिकल स्टोर हैं। मरीज भर्ती होने पर सबसे पहले ग्लव्स सहित सर्जिकल सामान और कुछ जरूरी दवाएं मंगाई जाती हैं। 500 से 1500 रुपये में सर्जिकल सामान और दवाएं आती हैं इसके बाद सर्जिकल सामान मंगाने का सिलसिला चलता रहता है।
गहन चिकित्सा कक्ष ICU में मरीज के 24 घंटे भर्ती रहने पर पांच से 10 हजार रुपये तक सर्जिकल सामान और दवाओं का बिल वसूला जा रहा है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख तुकाराम मुंढे ने एक्स पर सर्जिकल सामान की एमआरपी और थोक रेट के लिए कराए गए सर्वे के आंकड़े साझा किए हैं। इससे कहीं ज्यादा एमआरपी और थोक रेट में यहां अंतर है।
अस्पताल से ही सर्जिकल सामान और दवाएं लेने की मजबूरी
मरीज भर्ती होने पर सर्जिकल सामान और दवाएं मरीज निजी मेडिकल स्टोर और थोक दवा की दुकान से लेकर आते हैं तो उन्हें वापस कर दिया जाता है। अस्पताल से ही सर्जिकल सामान लेने का दबाव बनाया जाता है।
एक थोक दवा कारोबारी ने बताया कि उन्हें इंट्राकैथ 50 रुपये का दिया गया जबकि उसके थोक रेट आठ रुपये थे। उनसे कहा गया बाहर से सामान लेकर आ जाते हैं तो मना कर दिया गया।
अंकुश के लिए सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर से बहस
आरटीआइ कार्यकर्ता, पीडियाट्रिक सर्जन डा. संजय कुलश्रेष्ठ ने इसी वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 20 जुलाई को हुई सुनवाई में डा. संजय कुलश्रेष्ठ ने मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवाओं के बिल भी लगाए गए हैं। 1558 रुपये एमआरपी का एंटीबायोटिक इंजेक्शन 400 रुपये में बाजार में मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि दवाएं और सर्जिकल सामान पर थोक और खुदरा दवा विक्रेता 16 प्रतिशत तक मुनाफा ले सकते हैं। ऐसे में फार्मा कंपनियों द्वारा दवा विक्रेताओं को मिलने वाले 16 प्रतिशत मुनाफा को शामिल करते हुए एमआरपी रखी जानी चाहिए। औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) द्वारा इनके दिशा निर्देश भी जारी किए जाते हैं।
मगर, फार्मा कंपनियां दवाओं की एमआरपी निर्धारित मूल्य से कई गुणाा अधिक रखी जाती हैं। ये दवाएं मरीजों को महंगी मिलती हैं और दवा विक्रेता मुनाफा कमाते हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर से बहस शुरू होनी है।
