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    एसएन मेडिकल कॉलेज में मुफ्त की गई पहली Heart Bypass सर्जरी, 72 घंटे में मरीज की छुट्टी कर बनाया रिकार्ड

    By Ajay Dubey Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Fri, 17 Apr 2026 11:08 PM (IST)

    एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा ने 172 वर्षों में पहली हार्ट बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक की। 66 वर्षीय रतनलाल शर्मा की धड़कते दिल की यह सर्जरी असाध्य रोग निधि स ...और पढ़ें

    आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज।

    आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज।

    जागरण संवाददाता, आगरा। देश के पुराने मेडिकल कालेजों में से एक एसएन मेडिकल कालेज में 172 वर्ष में पहली हार्ट बाईपास सर्जरी की गई। मरीज का दिल छह महीने से 35 प्रतिशत काम कर रहा था और तीन में से दो धमनियों में 100 प्रतिशत की ब्लाॅकेज थी।

    धड़कते हुए दिल की बाईपास सर्जरी करने के बाद मरीज की शुक्रवार को 72 घंटे में शुक्रवार को छुट्टी कर रिकार्ड बनाया है। असाध्य रोग निधि से मरीज की निश्शुल्क सर्जरी की गई। आवास विकास सिकंदरा के रहने वाले 66 वर्ष के रतनलाल शर्मा के कंधे और सीने में दर्द होने पर तबीयत बिगड़ी थी।

    पिछले वर्ष नवंबर में एसएन मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। एंजियोग्राफी में दिल को खून की सप्लाई करने वाली तीन धमनियों में से दो धमनियों में 100 प्रतिशत ब्लाॅकेज थी, हार्ट अटैक पड़ने से दिल की क्षमता 35 प्रतिशत रह गई थी। हार्ट बाईपास सर्जरी की सलाह दी गई लेकिन एसएन में यह सुविधा शुरू नहीं हुई थी।

    कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डा. सुशील सिंघल ने बताया कि हाई रिस्क मरीज को 10 अप्रैल को भर्ती किया गया। गृहस्थ राशन कार्ड होने पर मरीज का असाध्य रोग निधि से सर्जरी के लिए पंजीकरण कराया गया। 13 अप्रैल की रात 10 बजे मरीज की धड़कते हुए दिल की (ऑफ पंप कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग) बाईपास सर्जरी की गई।

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    पैर से खून की नसों को लेकर दिल की धमनियों में ज्यादा ब्लाॅकेज थी, उसे बाईपास किया गया। चार घंटे तक सर्जरी चली। सर्जरी की सटीकता और सर्जरी के बाद मरीज की प्रशिक्षित टीम द्वारा देखभाल करने से 72 घंटे बाद ही छुट्टी कर दी गई।

    रतनलाल शर्मा की पत्नी प्रियंका शर्मा ने बताया कि उनकी चार बेटी और एक बेटा है, निजी अस्पतालों में चार से पांच लाख रुपये सर्जरी का खर्चा बताया था, यहां फ्री सर्जरी की गई है।

    प्राचार्य डा. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि एसएन की स्थापना 1854 में थामसन हाॅस्पिटल के नाम से हुई थी और 1947 में सरोजनी नायडू मेडिकल कालेज नाम रखा गया था। 172 वर्ष में यह पहली हार्ट बाईपास सर्जरी हुई है।

    टीम में कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डा. सुशील सिंघल, डा. शिव, डा. सुलभ गर्ग, डा. आरती, एनेस्थीसिया टीम से डा. अपूर्व मित्तल, डा. योगिता, डा. अतिहर्ष मोहन, डा. अमिता, डा. रोहन, डा. अखिल, डा. विकास, सिस्टर प्रमिला, श्वेता, सुमन, प्रिया, सचिन और मोनू का सहयोग रहा।

    सबसे कम समय में छुट्टी के रिकार्ड का दावा


    प्राचार्य डा. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि विश्व भर में हार्ट बाईपास सर्जरी के बाद पांच से सात दिन बाद मरीज की छुट्टी की जाती है। मगर, एसएन में सर्जरी के बाद 72 घंटै में मरीज की छुट्टी कर रिकार्ड बनाने का दावा किया जाएगा।

    केजीएमसी, लखनऊ के साथ राजकीय मेडिकल कालेजों में कानपुर के बाद एसएन में ही हार्ट बाईपास सर्जरी की सुविधा है। इससे आगरा के साथ ही मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, हाथरस, भरतपुर के मरीजों को लाभ मिलेगा।

    35 मरीजों का पंजीकरण, 1.60 लाख का खर्चा


    एसएन में हार्ट बाईपास सर्जरी के लिए 35 मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है। जिन मरीजों पर आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड नहीं हैं उन्हें सर्जरी का शुल्क आठ हजार सहित सर्जरी के अन्य सामान के लिए करीब 1.60 लाख रुपये जमा करने होंगे। धीरे धीरे सर्जरी की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए अभी और संसाधन जुटाए जा रहे हैं।