अब डकैतों का नहीं टूरिस्ट का बसेरा, रोमांच और एडवेंचर का नया केंद्र चंबल सेंक्चुरी
चंबल बीहड़, जो कभी डकैतों का गढ़ था, अब पर्यटकों के लिए रोमांचक स्थल बन गया है, जहां वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य आकर्षित करते हैं। राष्ट्रीय चंबल अभय ...और पढ़ें

HighLights
चंबल बीहड़ अब डकैतों की जगह पर्यटकों का पसंदीदा स्थल।
घड़ियाल, डॉल्फिन, दुर्लभ कछुए और पक्षियों का प्राकृतिक आवास।
सुरक्षित पर्यटन के लिए रिजॉर्ट और सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अभिषेक सक्सेना, आगरा। लाइट, कैमरा, एक्शन... कभी दस्यु डकैतों की गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजने वाला बीहड़ आज टूरिस्ट की कैमरों की फ्लश लाइट और रोमांच से खिल रहा है। इस चंबल में नदी है, पहाड़ियां हैं, तालाब हैं। वहीं जंगली और जलीय वन्य जीव को देखने का रोमांच है। अपहरण के लिए कभी ठिकाना बना बीहड़ अब ठहरने के लिए भी फेमस है। यहां आपको अच्छे और किफायती दामों में रिजॉर्ट देखने को मिल जाएंगे। यूथ को ये जगह अब खूब पसंद आने लगी है। वहीं फैमिली पिकनिक के लिए भी लोग यहां आ रहे हैं।
डेढ़ दशक पहले तक डर और खौफ का पर्याय रही चंबल नदी अब देशभर के टूरिस्ट को लुभा रही है। नदी के पास अब डकैतों का डेरा नहीं, सैलानियों का बसेरा लगने लगा है। डॉल्फिन, घड़ियाल, दुलर्भ प्रजातियों के कछुएं और विलुप्त श्रेणी में शुमार कई पक्षी पर्यटकों की बढ़ती संख्या की वजह बन रहे।
बढ़ रहा है जीव-जन्तुओं का कुनबा
वर्ष 1979 में चंबल के राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के क्षेत्र को राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट घोषित किया गया। इसके बाद से चंबल में घड़ियाल और डॉल्फिन की संख्या बढऩे लगी। अब लॉयन सफारी के मिल जाने से पयर्टन का एक ऐसा सर्किट तैयार हुआ है जो चंबल के बीहड़ को देखने की ख्वाहिश रखने वालों का ध्यान खींच रहा है। इटावा की लॉयन सफारी में एशियन शेर हैं।

चंबल नदी में मगरमच्छ।
चंबल में जीवों की संख्या
- घड़ियाल: 2,938 (देश में घड़ियालों का यह सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास है)
- मगरमच्छ: (Marsh Crocodile): 900 से अधिक
- गंगा डॉल्फिन: (Ganges River Dolphin): 155 डॉल्फिन हैं। इसके अलावा कई तरह की मछलियां भी यहां मिलती हैं।
- राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में मीठे पानी के कछुओं की संख्या 3,500 दर्ज की गई है।
- चंबल नदी में कछुओं की कुल 8 से 9 प्रजातियां निवास करती हैं। रेड क्राउन रूफ्ड टर्टल (साल/बाटागुर), थ्री स्ट्राइप्ड रूफ्ड टर्टल (धोंड), सुंदर सुंदरी, और मोरपंखी कछुए शामिल हैं।
देखने के लिए मिल जाएंगी दुर्लभ प्रजातियां
- चंबल नदी में दुनिया के 80 फीसद घडिय़ालों का बसेरा है। उदी, इटावा चंबल तट पर भी यह रोमांचकारी नजारा देखने को मिल सकता है
- सैकड़़ों प्रजाति की देसी-विदेशी चिड़ियों को औरैया जिले में पांच नदियों के संगम के अलावा इटावा, जालौन जिले की सीमा पर देखा जा सकता है
- आठ से नौ किस्म के कछुए यहां देखने को मिलते हैं, जो दुर्लभ प्रजाति के हैं
- मुरैना (मध्यप्रदेश) के देवरी में घडिय़ाल, मगरमच्छ और कछुए की हेचरी भी है
- डॉल्फिन और मगरमच्छ आगरा के पिनाहट व नदगंवा में भी दिखते हैं, मुरैना में डॉल्फिन पोइंट भी है
- स्कीमर पक्षी तो सिर्फ चंबल में ही पाया जाता है
- ब्लैक बेलिएड टर्नस, सारस, क्रेन, स्टार्क पक्षी इन नदी में कलरव करते देखे जा सकते हैं
चंबल सेंक्चुरी ऐसे पहुंचे
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से नेशनल चंबल सेंक्चुरी लगभग 118 किलोमीटर की दूरी पर है। ये आगरा-बाह मार्ग से 107 किलोमीटर की दूर है। यहां कार व बसों से जाया जा सकता है
आगरा−झांसी रेलमार्ग पर धौलपुर स्टेशन पर उतरकर भी पहुंच सकते हैं। लेकिन यहां पर सीमित होटल हैं।
बारिश के बाद का मौसम है सबसे बेस्ट
जंगलों से घिरा यह टूरिस्ट प्लेस सुंदर होने के साथ जोखिम से भरा भी है। इसलिए सैलानियों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। बिना लाइफ जैकेट या ट्यूब के बिना नदी में जाने की मनाही है। अविरल बहने वाले प्राकृतिक पानी का मनोरम दृश्य सैलानियों को आकर्षित करने को तैयार है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरे चंबल में ठहरने की सुविधाएं भी हैं। आसपास बने रिजॉर्ट में पर्यटक बोनफायर का मजा ले सकते हैं। यहां आने का सबसे अच्छा मौसम बारिश के बाद का है, जब नदी में पानी भरपूर होता है और मौसम भी कूल-कूल हो जाता है।

