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ध्रुव जुरैल का श्रीलंका में पहला टेस्ट शतक, 'जय जवान, जय किसान' टैटू से जीता दिल; जुनून भरी है जीवन की दास्तां

By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
Updated: Tue, 25 Aug 2026 10:31 PM (IST)

ध्रुव जुरैल ने कोलंबो टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ शानदार 115 रन की नाबाद पारी खेलकर अपना दूसरा टेस्ट शतक ...और पढ़ें

ध्रुव जुरैल की बाजू पर चमकता जय जवान..जय किसान।

ध्रुव जुरैल की बाजू पर चमकता जय जवान..जय किसान।

HighLights

  1. पांच साल की उम्र में हुए थे दुर्घटना का शिकार

  2. मां ने सोने की चेन गिरवी रख खरीदी क्रिकेट किट

सुमित द्विवेदी, आगरा। डिफेंस कालोनी के निवासी विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरैल ने सोमवार को कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ चल रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन शानदार शतक जड़कर आगरा को गर्वित किया। जुरैल ने नंबर सात पर आकर नाबाद 115 रन बनाए, जो उनके टेस्ट करियर का दूसरा और विदेश में पहला शतक है।

शतक पूरा करने के बाद उन्होंने अपने हाथ पर बने 'जय जवान, जय किसान' टैटू को दिखाया। भारत ने पहली पारी में 503 रन पर नौ विकेट खोकर पारी घोषित की। जुरैल ने 177 गेंदों में नौ चौके और दो छक्के लगाए। उन्होंने ऋषभ पंत के साथ 112 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी भी की। शतक पूरा करने के लिए उन्होंने जोखिम भरा सिंगल लिया और सेलिब्रेशन में अपने हाथ का टैटू दिखाया

जो उनके पिता और दादा की विरासत को दर्शाता है। खंदौली गांव से निकले इस खिलाड़ी की सफलता से स्थानीय क्रिकेट प्रेमी खुश हैं। जुरैल की इस पारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। कोच परवेंद्र यादव ने बताया ध्रुव ने संभली हुई पारी खेली है। सिटीजन क्रिकेट क्लब के सचिव मुईन बाबू ने कहा, उन्होंने अच्छी पारी खेली, बेहतर नियंत्रण दिखाया।

पिता चाहते थे सेना में जाए बेटा

ध्रुव जुरैल का जन्म 21 जनवरी 2001 को आगरा के खंदौली के पेंथ खेड़ में हुआ। उनके पिता नेम सिंह जुरैल भारतीय सेना में हवलदार रहे और कारगिल युद्ध भी लड़ चुके हैं। मां राजनी जुरैल गृहिणी हैं। शहर में डिफेंस कालोनी में रहने से पहले परिवार गांव में रहता था। पिता चाहते थे बेटा एनडीए पास करके सेना में जाए, लेकिन ध्रुव का मन क्रिकेट में लग गया। ध्रुव की पढ़ाई आगरा के आर्मी पब्लिक स्कूल से हुई

समर कैंप से हुई शुरुआत

आठवीं कक्षा में स्कूल के समर कैंप में उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत की। समर कैंप में पहले स्विमिंग ज्वाइन की, ऐसे में वहां कुछ छात्रों को लेदर की गेंद से क्रिकेट खेलते देखकर क्रिकेट में दिल लग गया, तभी से क्रिकेट शुरू कर दिया

इसके बाद पिता उन्हें कैंट स्थित स्प्रिंगडेल क्रिकेट अकादमी ले गए, जहां कोच परवेंद्र यादव ने प्रशिक्षण दिया। बाद में बेहतर मौका पाने के लिए नोएडा के फूलचंद शर्मा की अकादमी में चले गए।

संघर्षों के बाद पाई सफलता

ध्रुव जुरैल का पांच साल की उम्र में बस के टायर के नीचे बायां पैर आ गया। प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। 14 साल की उम्र में जब क्रिकेट किट की जरूरत पड़ी तो पिता ने मना कर दिया। ध्रुव ने घर छोड़ने की धमकी दी और बाथरूम में बंद हो गए। तब मां ने अपनी सोने की चेन गिरवी रखकर किट खरीद दी

पिता शुरू में क्रिकेट का विरोध करते रहे। ध्रुव ने 13-14 साल की उम्र में अकेले आगरा से नोएडा ट्रेन पकड़कर अकादमी पहुंच गए। दोस्त के घर रहने का इंतजाम नहीं हुआ तो कोच ने हास्टल में जगह दी। बाद में मां भी नोएडा शिफ्ट हो गईं।

एमएस धोनी हैं ध्रुव के आदर्श

ध्रुव हनुमान भक्त हैं और एमएस धोनी को अपना आदर्श मानते हैं। यूपी की अंडर-14, 16, 19 टीमों में खेल चुके हैं। वर्ष 2020 अंडर-19 विश्व कप में उपकप्तान रहे। आज टीम इंडिया में विकेटकीपर-बैट्समैन के रूप में जगह बना चुके हैं।