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शाहजहां की बेटी जहांआरा ने बनवाई थी जो आगरा की जामा मस्जिद, उसका कलश आंधी में हुआ टेढ़ा; ASI कराएगा मरम्मत

Published: Mon, 22 Jun 2026 03:33 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 22 Jun 2026 03:38 PM (GMT+05:30)

आगरा की जामा मस्जिद के मुख्य गुंबद का कलश आंधी में टेढ़ा होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ...और पढ़ें

आगरा की जामा मस्जिद।

आगरा की जामा मस्जिद।

HighLights

  1. जामा मस्जिद का कलश आंधी में टेढ़ा हो गया था।

  2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने संरक्षण के लिए उतारा।

  3. टूटी लोहे की रॉड की जगह स्टील लगेगी।

जागरण संवाददाता, आगरा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने जामा मस्जिद के मुख्य गुंबद के कलश (पिनेकल) को संरक्षण के लिए उतारा है। आंधी में यह टेढ़ा हो गया था और एक ओर झुक गया था। जामा मस्जिद के गुंबद पर लगा कलश करीब 16 फीट ऊंचा है। यह 10 टुकड़ों में बना हुआ है।

कलश गुंबद के मध्य लगी राड में फिक्स था। कलश के टेढ़ा होने की मुख्य वजह राड टूटने को माना जा रहा है। आठ वर्ष पूर्व गुंबद में लगी लोहे की रॉड जंग लगने से खराब होने पर उसमें स्टील की रॉड को वेल्डिंग कर जोड़ा गया था। 

आगरा किला के पास स्थित जामा मस्जिद एएसआई द्वारा संरक्षित है। इसका निर्माण शाहजहां की बेटी जहांआरा ने कराया था। जहांआरा ने वर्ष 1648 में पांच लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण कराया था। रेड सैंड स्टोन से बनी जामा मस्जिद एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है। इसमें एक बड़ा दालान है, जिसके मध्य वजू टैंक बना हुआ है।

मुख्य गुंबद के ऊपर लगा कलश करीब 16 फीट ऊंचा

मस्जिद में दो ताफ बरामदा है। इसकी छत पर तीन गुंबद हैं। इनमें से मुख्य गुुंबद के ऊपर लगा कलश आंधी में टेढ़ा हो गया था। गुंबद पर लगे कलश को एएसआई ने 10 दिन काम कर उतरवाया है। कलश के पार्ट्स तो ठीक हैं, लेकिन अंदर लगी लोहे की रॉड टूट गई है। लोहे की रॉड को हटाकर स्टील की रॉड लगाई जाएगी।

वरिष्ठ संरक्षण सहायक प्रिंस वाजपेयी ने बताया कि जामा मस्जिद के मुख्य गुंबद में कलश के अंदर लगी रॉड टूट गई है। विभागीय इंजीनियर निरीक्षण कर पुरानी रॉड को पूरी तरह निकालने या वेल्डिंग कर नई रॉड जोड़ने का निर्णय लेंगे।

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वर्ष 2018 में टूट गया था कलश

जामा मस्जिद का कलश 11 अप्रैल, 2018 को 132 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान में दो भागों में टूट गया था। छह फीट ऊंचा हिस्सा गुंबद में फंसा रह गया था, जबकि नौ फीट ऊंचा हिस्सा टूटकर गिर गया था।। कलश में लगी लोहे की रॉड जंग लगने की वजह से कमजोर होकर टूट गई थी।

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की शाखा कर रही है संरक्षण

एएसआई ने गुंबद में छह फीट तक खोदाई कर पुरानी लोहे की रॉड को निकालने का प्रयास किया था। पूरी रॉड निकालने को चार फीट तक और खोदाई करनी पड़ती। चार फीट तक राड अच्छी स्थिति में थी। उसके ऊपर स्टील की रॉड जोड़कर कलश लगा दिया गया था। तब इस पर तीन लाख रुपये व्यय हुए थे।

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