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    कहीं आपका बच्चा भी मोबाइल गेम में बिजी तो नहीं रहता, दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को हाईजैक कर रहे ये; जानलेवा हो रही लत

    By Ajay Dubey Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Thu, 05 Feb 2026 02:23 PM (IST)

    गाजियाबाद की घटना के बाद मोबाइल गेम की लत पर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ये गेम बच्चों के दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को हाईजैक कर डोपामाइन स्राव ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. मोबाइल गेम दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को हाईजैक करते हैं।

    2. हर चौथे युवा में मोबाइल की लत पाई जा रही है।

    जागरण संवाददाता, आगरा। गाजियाबाद में मोबाइल गेम की लत में तीन सगी बहनों के नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने की घटना से हर कोई हैरान है। बच्चों को यूं ही मोबाइल गेम की लत नहीं लग रही है, मोबाइल गेम बच्चों के रिवार्ड सिस्टम ( सुखद अनुभव ) को हाईजैक कर रहे हैं।

    इसके बाद बच्चे वही करते हैं जो उन्हें मोबाइल गेम खिलाने वाले वर्चुअल खिलाड़ी निर्देश देते हैं हैं। इसमें वे अपना दिमाग नहीं लगाते हैं। यही घातक हो रहा है।

    मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि जब किसी काम के लिए प्रशंसा होती है तो मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम में डोपामाइन सहित अन्य हार्मोन का स्राव होता है इससे खुशी मिलती है। बच्चे वर्ष भर पढ़ाई करते हैं, इसके बाद अच्छे अंक आने पर प्रशंसा होती है। इसमें समय ज्यादा लगता है।

    ऐसे बच्चे जिनकी घर में प्रशंसा नहीं होती है, पारिवारिक समस्याओं के बीच परेशान रहते हैं वे खुशी के लिए मोबाइल पर गेम खेलना शुरू करते हैं। मोबाइल गेम खेलने पर प्वाइंट और गोल्ड काइन मिलते हैं, इससे तुरंत खुशी मिलती है। यहां से धीरे- धीरे मोबाइल गेम खेलने का समय बढ़ता जाता है।

    जैसे जैसे गेम खेलने का समय बढ़ता जाता है डोपामाइन हार्मोन का स्राव तेजी से बढ़ने लगता है। ये वर्चुअल दुनिया को हकीकत मानने लगते हैं, समाज से दूर होते जाते हैं। किसी से बात तक नहीं करते हैं। ये लत जानलेवा होने लगती है, वर्चुअल खिलाड़ी जो टास्क और चैलेंज देते हैं उन्हें ये आंख बंद कर पूरा करने में लग जाते हैं।

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    ये टास्क ही जानलेवा होते हैं। एसएन मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डा. विशाल सिन्हा ने बताया कि मोबाइल और मोबाइल गेम की लत लगने पर इससे बाहर निकलने में चार से छह महीने लग जाते हैं। रिपिटेटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (आरटीएमएस) और दवाओं से रिवार्ड सिस्टम को ठीक किया जाता है।

    काउंसिलिग की जाती है। बच्चों को खेलकूद सहित अन्य काम में लगाया जाता है, लत छूटने में छह महीने तक का समय लग जाता है।

    एआई बेस्ड मोबाइल गेम होते हैं घातक: प्रो. दिनेश राठौर

    मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक .प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि एआइ बेस्ट मोबाइल गेम ज्यादा घातक हैं, बच्चों को जिस तरह के गेम से खुशी मिलती है उसी तरह के गेम बच्चों के सामने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बार बार दिखाए जाते हैं। इससे वे गेम से बाहर नहीं निकल पाते हैं। एआइ बेस्ट मोबाइल गेम पर रोक लगनी चाहिए।

    डॉक्टर के पास आने वाले युवाओं में हर चौथे में लत: डा. विशाल सिन्हा

    एसएन मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डा. विशाल सिन्हा ने बताया कि मनोचिकित्सक के पास परार्श लेने पहुंच रहे 20 वर्ष तक की आयु के युवाओं में हर चौथे में मोबाइल की लत सामने आ रही है। यह शराब सहित अन्य लत की तरह से ही होती है, मोबाइल का इस्तेमाल करने से रोकने पर ये उग्र व्यवहार करने लगते हैं।


    मोबाइल गेम जो चर्चा में रहे

    • 2017 में ब्लू व्हेल गेम इसमें टास्क पूरा करने का चैलेंज दिया जाता था , इस गेम की लत से कथित मौत भी हुईं।
    • 2018 में किकी चैलेंज और मोमो चैलेंज इसमें छोटे छोटे चैलेंज दिए जाते थे।
    • कोरियन लव गेम एक आनलाइन, टास्क आधारित इंटरैक्टिव गेम है। इस गेम में खिलाड़ी एक वर्चुअल साथी चुनते हैं, जो उनसे कोरियन भाषा में बात करता है, प्यार भरे संदेश भेजता है और उन्हें रोजाना नए काम (टास्क) सौंपता है। यह गेम मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफार्म और मैसेजिंग एप के माध्यम से फैलता है।

     

    मोबाइल गेम की लत के लक्षण

    • मोबाइल पर ज्यादा समय व्यतीत करना, एक घंटे से ज्यादा लगातार स्क्रीन टाइम।
    • किसी से बात ना करना, अकेले रहना पसंद करना।
    • पढ़ाई में मन न लगना और नंबर कम आना।
    • मोबाइल न देने पर उग्र व्यवहार करना।

     

    ये करें

    • माता पिता बच्चों को अधिक से अधिक समय दें।
    • बच्चों को खेलकूद गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।
    • सप्ताह में एक दिन मोबाइल हाेलीडे रखें।
    • माता पिता भी घर में मोबाइल का इस्तेमाल ना करें।
    • मोबाइल का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए ही करने दें।