मांगलिक कार्य हुए बंद, पुरुषोत्तम मास हो रहा शुरू; शुभ अवसरों के लिए हिंदू मान्यता में अब कब हटेगी रोक
भगवान विष्णु को समर्पित मलमास (अधिक मास) 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा, जिसमें विवाह और गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। यह अतिरिक्त म ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। भगवान विष्णु को समर्पित मलमास यानी अधिक मास का आरंभ 17 मई से हो रहा है जो कि अगले 15 जून तक रहने वाला है। यह संयोग सूर्य और चंद्र कैलेंडर के बीच का फर्क की वजह से होता है।
सौर वर्ष 365 दिन का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिन का यह अंतर हर 32 महीने और 16 दिनों में इतना बढ़ जाता है कि पंचांग को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।
इस दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नवीन प्रतिष्ठा जैसे मांगलिक व सांसारिक कार्य इस मास में सामान्यतः वर्जित माने गए हैं।
वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी पूर्णानंदपुरी ने कहा कि इस बार ज्येष्ठ में अधिक मास रहेगा यानी ज्येष्ठ एक नहीं, बल्कि दो महीनों तक रहेगा, जिसमें 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा। इसके बाद 17 मई से अधिक मास मास शुरू होगा, जो 15 जून तक चलेगा।
इसके बाद ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा, जो कि 29 जून तक रहेगा। स्वामी पूर्णानंदपुरी ने बताया कि अधिकमास की गिनती मुख्य महीनों में नहीं होती है।
इस अवधि में श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु का पूजन, श्रीमद्भागवत एवं गीता पाठ, हरिनाम संकीर्तन, गोसेवा, अन्नदान, वस्त्रदान, तीर्थसेवा तथा संतसेवा जैसे पुण्य कार्य करने चाहिए।
त्योहारों में समय परिवर्तन से बचाता है अधिक मास
स्वामी के अनुसार सनातन धर्म में लगभग सभी व्रत त्योहार चंद्रमा की तिथियों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। चंद्रमा लगभग 29 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता है, जिसे एक चंद्र मास कहते हैं।
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जब चंद्रमा पृथ्वी के 12 चक्कर लगा लेता है तो इसे एक चंद्र वर्ष कहते हैं जो लगभग 355 दिन का होता है। वहीं सौर वर्ष 365 का होता है।
अधिक मास की व्यवस्था न हो तो व्रत त्योहार हर साल 10 दिन पीछे खिसकते चले जाएंगे, जिससे दीपावली बरसात में और होली शीत ऋतु में मनाई जाने लगेगी। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही अधिकमास की व्यवस्था है।