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    सीए बनकर पूरा किया मां और दादा का सपना, अलीगढ़ की ऋचा वर्मा संभाल रहीं कंपनी की जिम्मेदारी

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 10:43 PM (IST)

    ऋचा वर्मा ने पांच साल की उम्र में पिता को खोने के बावजूद सीए बनकर मां और दादा का सपना पूरा किया। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. ऋचा ने पांच वर्ष की आयु में पिता को खोया।

    2. सीए बनकर मां और दादा का सपना पूरा किया।

    3. ससुर और पति भी सीए, परिवार व कंपनी की जिम्मेदारी संभालती हैं।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। सीए ऋचा वर्मा का जीवन संघर्ष भरा रहा है। जब वह पांच वर्ष की थीं, तब सिर से पिता का साया उठ गया। ऋचा ने हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल से स्कूलिंग की। कॉमर्स में कक्षा 12 पास की। तय किया कि नौकरी करने से बेहतर सीए बनकर खुद की कंपनी बनाएं। स्कूल में इनकी मेधावी छात्रा के रूप में पहचान थी।

    वर्ष 2020 में सीए की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2021 में सीए पति कुनाल वार्ष्णेय से शादी हो गई। तभी से पति व सीए ससुर सुबोध वार्ष्णेय का मार्गदर्शन मिल रहा है। वह एक पत्नी, बहू व मां की भी जिम्मेदारी निभा रही हैं। वह कहती हैं कि पिता न होने से अब उन्हें ससुराल में बेटी की तरह ससुर व सास स्नेह मिल रहा है।

    पक्की सराय निवासी ज्वेलर्स धर्मेंद्र वर्मा के तीन बच्चे हैं। इनमें बेटी शुभांगी वर्मा, ऋचा वर्मा व बेटा उत्कर्ष वर्मा है। धर्मेंद्र का अल्पायु में निधन हो गया। यह परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था। इनकी पत्नी माला वर्मा हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल में प्रिंसिपल थीं।

    दादा ने तीनों बच्चों को पिता का स्नेह दिया। ऋचा ने दादा व मां के दर्द को जाना। वह किशोर अवस्था में पहुंचीं तो उन्होंने पढ़ाई के लिए दिन रात मेहनत की। परिवार में मां प्रिंसिपल होने से वातावरण पढ़ाई के हिसाब से अनुकूल था। ऋचा की बड़ी बहन भी पढ़ने में तेज थीं। वे शिक्षक बनना चाह रही थीं।

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    ऋचा ने सीए बनने का निर्णय लिया। इसमें मां ने पूरा साथ दिया। सीए की पढ़ाई पूरी हो गई, तो उन्होंने जॉब करने का मन बनाया। इसी बीच इनकी शादी कुनाल वार्ष्णेय से हो गई। कुनाल के पिता भी सीए थे। वे सीए फर्म का पहले से संचालन करते थे।

    ऋचा कहती हैं कि उन्होंने पिता को मात्र पांच वर्ष की आयु में खो दिया था। ससुराल में उन्हें ससुर के रूप में पिता मिले हैं। काम के साथ वह अपने पांच वर्ष के बेटे की देखभाल करती हैं। परिवार में पत्नी व बहू का फर्ज भी अदा करती हैं।