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'मथुरा-काशी और संभल भी हमारे होंगे', अलीगढ़ में रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बड़ा बयान

Published: Tue, 16 Jun 2026 12:29 PM (IST)Updated: Tue, 16 Jun 2026 12:38 PM (IST)

अलीगढ़ में श्रीरामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि हम मथुरा, काशी व संभल भी लेकर रहेंगे। उन्होंने सनातन ...और पढ़ें

रामभद्राचार्य

रामभद्राचार्य

HighLights

  1. जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मथुरा, काशी, संभल को लेकर दिया बयान।

  2. श्रीरामकथा समाज को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

  3. कथा श्रवण से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं।

संवाद सूत्र, अकराबाद (अलीगढ़)। गांव लधौआ स्थित आनंद एग्रो केम चीनी मिल परिसर में चल रही विराट श्रीरामकथा में सोमवार को जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने धर्म, संस्कृति व सनातन परंपरा को लेकर मुखर वक्तव्य दिया।

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि जहां-जहां हमारे पवित्र स्थल हैं, हम मथुरा, काशी व संभल भी लेकर रहेंगे। उनके इस वक्तव्य पर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ समर्थन जताया।

पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि श्रीरामकथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता के चरित्र में जीवन के सभी आदर्श समाहित हैं। सनातन संस्कृति की रक्षा और संरक्षण के लिए समाज को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

विराट श्रीरामकथा में धर्म, संस्कृति व आस्था का उमड़ा सैलाब

कथा के दौरान उन्होंने याज्ञवल्क्य भारद्वाज संवाद, शिव-सती प्रसंग व भगवान राम की दिव्यता का वर्णन करते हुए कहा कि राम कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि स्वयं परमब्रह्म हैं। उन्होंने कहा कि सत्संग व कथा श्रवण से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्रद्धालुओं ने किया कथा श्रवण

जगद्गुरु ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान उसके तीर्थ, मंदिर व आध्यात्मिक परंपराएं हैं। इन्हें संरक्षित रखना प्रत्येक सनातनी का दायित्व है। कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म व राष्ट्रहित में संगठित रहने का आह्वान भी किया।

अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि मनुष्य के दस प्रकार के पाप होते हैं। इसमें तीन मन के, चार वाणी के और तीन शरीर से जुड़े होते हैं। भगवान श्रीराम व माता सीता की दस दिव्य लीलाओं का श्रवण इन दसों पापों का नाश करने वाला है। उन्होंने कहा कि श्रीरामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि व जीवन परिवर्तन का माध्यम है।

कथा श्रवण से नष्ट होते हैं मनुष्य के 10 पाप, कथा में गूंजते रहे जय श्री राम के नारे

विशाल कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। कथा स्थल पर देर शाम तक भक्ति व आस्था का माहौल बना रहा। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में भी कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस मौके पर आयोजक देवेंद्र सिंंह, पंकज मिश्र, टैनी ठाकुर, प्रतापसिंह, रिषीपाल सिंंह, एसके सिंह राणा, नीरज शर्मा, अवधेश शर्मा, मोनू सिंह, रिंकी, कोमल कुमारी, पवन, मोहित उपाध्याय, रविकांत पाराशर, दीपक कुमार, सौरभ दीक्षित समेत अन्य मौजूद रहे।

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