शूटर संजीव को साथी दिलीप वर्मा ने उपलब्ध कराई थी पिस्टल, एसटीएफ को चकमा देकर बदला था ठिकाना
बिल्डर संदीप सिंह की हत्या के मुख्य शूटर संजीव को पिस्टल उसके साथी दिलीप वर्मा ने मुहैया कराई थी, जो बाद में लखनऊ में एसटीएफ मुठभेड़ में मारा गया। ...और पढ़ें

संजीव के घर पर रोते-बिलखते स्वजन। जागरण

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जागरण संवाददता, अंबेडकरनगर। लखनऊ में बीते दिनों एसटीएफ से हुई मुठभेड़ में मारे गए बिल्डर संदीप सिंह की हत्या के मुख्य शूटर संजय उर्फ संजीव को पिस्टल उसके साथी दिलीप वर्मा ने मुहैया कराई थी।
वहीं, घटना को अंजाम देने जाते समय वो अयोध्या के दर्शननगर में रुका था। हत्या के बाद उसने आजमगढ़ की सीमा पर एक संगठन के कार्यकर्ता के घर करीब 20 दिनों तक पनाह ली थी।
वह स्थानीय बाजारों में घूमता रहा। एसटीएफ को घटना की कड़ी जोड़ने में साजिशकर्ता, शूटर मुहैया कराने वाले आसोपुर के ककराही के गंगाराम यादव, दिनेश कुमार यादव और मुकर्रबीन उर्फ मुबीन की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से मदद मिली। नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मोबाइल से उसकी लोकेशन ट्रेस कर एसटीएफ यहां पहुंच गई और सप्ताहभर तक कैंप किया। इस दौरान आलापुर, जहांगीरगंज, बसखारी, टांडा क्षेत्र और आजमगढ़ में उसकी तलाश में दबिश देती रही, लेकिन शातिर दिमाग वाले संजीव को जिले में एसटीएफ के एंट्री की भनक लग गई।
वह चकमार्गों के रास्ते पैदल, साइकिल व बाइक से भागकर ठिकाना बदलता रहा। साथियों, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों की मदद से दोबारा लखनऊ पहुंच गया। इससे उसकी तलाश में आई एसटीएफ गच्चा खा गई और उसे यहां से खाली हाथ वापस लखनऊ लौटना पड़ा।
स्थानीय पुलिस को शूटर के यहां छिपने की कानोकान भनक तक नहीं लगी। शव लेने लखनऊ गए स्वजन से एसटीएफ ने पूछताछ की। इस दौरान स्वजन ने दिलीप वर्मा और दो पनाहगारों के विरुद्ध भी कार्रवाई की मांग की है।
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सत्तादल के नेताओं के इर्द-गिर्द दिखता सजायाफ्ता दिलीप वर्मा
सजायाफ्ता अपराधी दिलीप वर्मा हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी वसूली जैसे संगीन अपराधों में लिप्त रहा। अयोध्या, अंबेडकरनगर, बस्ती, आजमगढ़ आदि जिलों में हुईं कई घटनाओं में संजीव की भी संलिप्तता रही। जमानत पर छूटा दिलीप वर्मा इन दिनों सत्तादल के नेताओं के इर्द-गिर्द देखा जा रहा है।
वाहनों के काफिले के साथ ही वह निजी अंगरक्षकों के साथ घूमता है। इंटरनेट मीडिया पर एक प्रभावशाली मंत्री के साथ उसकी तस्वीर तेजी से प्रसारित हो रही है।
वहीं, हाल में एक पदाधिकारी बने सत्तादल नेता के स्वागत कार्यक्रम में वह अगुवाई करते देखा गया था। हैरत की बात है कि अयोध्या-अंबेडकरनगर की पुलिस उसकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम है।
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