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    अमेठी में बढ़ती आबादी के साथ युवा बन रहे स्वावलंबी, रोजगार के मिल रहे नए-नए अवसर

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 05:29 PM (IST)

    अमेठी में बढ़ती आबादी के बावजूद रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे युवा स्वावलंबी बन रहे हैं और शिक्षा के स्तर में भी सुधार आया है। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    HighLights

    1. बढ़ती आबादी के बावजूद अमेठी में रोजगार के नए अवसर।

    2. शिक्षा के स्तर में सुधार, युवा बन रहे स्वावलंबी।

    3. उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों से हजारों को मिला रोजगार।

    देवेंद्र सिंह परिहार, अमेठी। जिले की जनसंख्या बढ़ रही है, तो वहीं लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जा रहा है। 2011 के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की आबादी 18,67,678 थी, जबकि वास्तविकता इससे अधिक है।

    मौजूदा समय में जिले की आबादी 25 लाख के करीब पहुंच गई है। आबादी बढ़ने के साथ ही रोजगार को भी पंख लगे और नए-नए अवसर के जरिए युवा स्वावलंबी बन रहे हैं। बढ़े संसाधनों ने जहां युवाओं को रोजगार दिया, वहीं शिक्षा के स्तर में भी काफी हद तक सुधार हुआ।

    जिले की कई बड़ी फैक्ट्रियां व संस्थान जिले की शान हैं, तो वहीं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं भी आर्थिक तरक्की की इबारत लिख रही हैं।

    जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 2011 में जिले में साक्षरता दर 64.27 प्रतिशत थी, जिसमें महिला 52.92 व पुरुष 75.47 है। वहीं जीडीपी 22,112 करोड़ के साथ ही प्रति व्यक्ति आय 10,6,134 है। वहीं जागरूकता कार्यक्रमों व शिक्षा के स्तर में सुधार के बूते लोग हम दो-हमारे दो पर अमल करने लगे।

    जिले को कई सौगातें मिली

    इसी के साथ गुजरते वर्षों में जिले को कई सौगातें मिली हैं। इसमें एसएमएलजी बेवरेजेज प्लांट, ज्ञान धारा पशु आहार, भलोटियाि मिल, इंडियन बाटलिंग गैस प्लांट, आर्डिनेंस फैक्ट्री, इंदिरा गांधी विमानन विश्वविद्यालय, राजीव गांधी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट, इंडोगल्फ फर्टिलाइजर, स्वशासी मेडिकल कालेज, एसीसी, जाफा, साल्वा एग्रो हेचरी, आरके एग्रो इंडस्ट्रीज, गोरखनाथ केमिकल, आईबी फिशफीड, मुर्गीदाना जैसे बड़े प्रतिष्ठानों से लोगों को रोजगार मिल रहा है।

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    पांच हजार से अधिक छोटे-बड़े अन्य उद्योगों के माध्यम से भी 35 हजार से अधिक लोगों की जीविका चल रही है। स्कूलों, अस्पतालों की संख्या में कई गुणा इजाफा हुआ। खासकर माल और शापिंग कांप्लेक्सों ने युवाओं को बड़े शहरों को जाने से रोका। वीवीरामजी, एनआरएलएम, पशुपालन, जिला उद्योग में लोगों को रोजगार के बड़े अवसर मिले हैं।

    20 हजार से अधिक लोग स्वयं का वाहन संचालित करके आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। खेतों में उत्पादन बढ़ा है तो वैज्ञानिक खेती ने भी किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया है। संचार क्रांति ने युवाओं को रोजगार थमाया है। जनसुविधा केंद्रों के माध्यम से दस हजार से अधिक युवा अपना परिवार चला रहे हैं।

    एक नजर में रोजगार सृजन

    • प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल : 11,877 से अधिक
    • सरकारी अस्पताल : 300 से अधिक
    • आंगनबाड़ी केंद्र : 1950
    • मॉल, कांप्लेक्स : 275 (लगभग)
    • छोटे-बड़े उद्योग : 5000
    • आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका : 49000
    • वीबीरामजी में पंजीकृत श्रमिक
    • एक्टिव वर्कर : 112157
    • महिला : 48465
    • स्वयं सहायता समूह : 10,900
    • स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं : 1,34,425
    • पंजीकृत श्रमिक : 1,18,723
    • उद्योग में मिला रोजगार : 15000 (लगभग)
    • पंचायत सहायक : 666
    • पंचायत मित्र : 665
    • सफाई कर्मी : 903

    सीएम युवा उद्यमी योजना, नंद बाबा दुग्ध योजना जैसी अन्य योजनाओं के जरिए युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। साथ ही एनआरएलएम के तहत समूह से जोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जो खुद के साथ ही दूसरों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं।

    -पूजा साहू, सीडीओ