अमरोहा की इस शिक्षिका का कमाल: बंद होने की कगार पर था सरकारी स्कूल, अपने खर्च पर बदल दी तस्वीर
शिक्षिका मृणालिनी ने अमरोहा के सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदल दी है, अपने निजी खर्च से सुविधाओं में सुधार कर बच्चों का नामांकन बढ़ाया है। नाजरपुर खुर ...और पढ़ें

अमरोहा के सलेमपुर नवादा स्थित स्कूल में बच्चों को पढ़ातीं मृणालिनी । जागरण
HighLights
पिछले वर्ष महज 40 बच्चों तक सिमटा था विद्यालय, अब 80 बच्चे पंजीकृत
निजी खर्च से झूले, फर्नीचर, एलईडी व स्टेशनरी उपलब्ध कराकर बढ़ाया बच्चों का उत्साह
जागरण संवाददाता, अमरोह। महिला शिक्षक मृणालिनी ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षक में लगन और समर्पण हो तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदली जा सकती है। प्राथमिक विद्यालय नाजरपुर खुर्द में अपनी कार्यशैली से विद्यालय को नई पहचान दिलाने के बाद अब वह जोया ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर नवादा में शिक्षा की अलख जगा रही हैं। एक समय कम नामांकन के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच चुके विद्यालय में अब बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में यहां 80 बच्चे पंजीकृत हैं।
वर्ष 2014 में मृणालिनी की नियुक्ति अमरोहा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय नाजरपुर खुर्द में सहायक अध्यापिका के रूप में हुई थी। उस समय विद्यालय में मात्र 28 बच्चों का नामांकन था, जबकि नियमित रूप से 10 से 15 बच्चे ही स्कूल आते थे। विद्यालय की स्थिति भी जर्जर थी और मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
उन्होंने गांव में घर-घर संपर्क अभियान चलाकर अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता से अवगत कराया। निजी खर्च से करीब डेढ़ लाख रुपये विद्यालय के सुंदरीकरण, रंगाई-पुताई, पौधारोपण तथा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किए। बच्चों को समय-समय पर स्टेशनरी उपलब्ध कराई और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए।
इसका परिणाम यह रहा कि विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़कर 100 से अधिक पहुंच गई। जून 2025 में उनका स्थानांतरण जोया ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर नवादा में हुआ। यहां पहुंचने पर विद्यालय में केवल 40 बच्चे पंजीकृत थे और उनकी उपस्थिति भी बेहद कम रहती थी। स्टाफ ने बताया कि अभिभावकों की रुचि न होने से विद्यालय बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था।
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मृणालिनी ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने सहकर्मियों के साथ गांव में घर-घर जाकर अभिभावकों से संवाद किया और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का भरोसा दिलाया। शुरुआत में काफी प्रयास करने पड़े, लेकिन धीरे-धीरे अभिभावकों का विश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने बच्चों का नामांकन सरकारी विद्यालय में कराना शुरू कर दिया।
बच्चों के लिए बेहतर माहौल तैयार करने के उद्देश्य से शिक्षिका ने अपने निजी खर्च से विद्यालय में फर्नीचर, झूले और खेल सामग्री उपलब्ध कराई। समय-समय पर बच्चों को स्टेशनरी भी वितरित की। कंपोजिट ग्रांट से विद्यालय की रंगाई-पुताई कराकर परिसर को आकर्षक बनाया गया। इन प्रयासों का असर यह हुआ कि वर्तमान में विद्यालय में 80 बच्चे पंजीकृत हैं।
वह अब भी स्टाफ के सहयोग से नामांकन बढ़ाने और विद्यालय में बेहतर सुविधाएं विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। बीएसए मोनिका ने बताया कि मृणालिनी विद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के साथ विभागीय कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उनके प्रयास अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायी हैं।
स्मार्ट क्लास शुरू करने की तैयारी
बच्चों की पढ़ाई को और अधिक रोचक बनाने के लिए मृणालिनी विद्यालय में स्मार्ट क्लास शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने अपने निजी खर्च से एलईडी टीवी खरीदकर विद्यालय में लगवा दी है। बीएसए से उद्घाटन कराने के बाद स्मार्ट क्लास का संचालन शुरू किया जाएगा, ताकि आधुनिक तकनीक के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।