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    कागजों पर ही करा दिए गए 1320 सास-बहू सम्मेलन; बिना कार्यक्रम हुए ही अधिकारियों ने खर्च कर दिए 21 लाख रुपये

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 01:10 AM (IST)

    अमरोहा में स्वास्थ्य विभाग पर सास-बहू सम्मेलन के नाम पर 21 लाख रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप लगा है। 1500 से अधिक सम्मेलनों में से केवल कुछ ही आयोजि ...और पढ़ें

    अमरोहा सीएचसी

    अमरोहा सीएचसी

    HighLights

    1. वित्तीय वर्ष में सीएचसी स्तर पर महज दो से तीन सम्मेलन कराकर की खानापूर्ति

    जागरण संवाददाता, अमरोहा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए सीएचसी स्तर पर 1500 से अधिक सास- बहू सम्मेलन होने थे। इसके लिए 1600 रुपये प्रति सम्मेलन के हिसाब से बजट मिला था। मगर हैरत की बात है कि विभाग ने वित्तीय वर्ष में कागजों में ही सम्मेलन करा दिए। महज दो या तीन सम्मेलन कराकर ही खानापूर्ति कर ली। जिसकी आड़ में 21 लाख रुपए से अधिक का बजट भी खर्च कर लिया गया है।

    सरकार हर साल सीएचसीस्तर पर सास-बहू का सम्मेलन कराने के लिए 1600 रुपये के हिसाब से बजट मुहैया कराती है। जिसका मकसद सास-बहू के बीच संबंध मधुर बनाना, परिवार नियोजन तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, संस्थागत प्रसव पर बढ़ावा देना, नसबंदी, गर्भवतियों की देखभाल, सास बहू के बीच झिझक को दूर करना आदि शामिल हैं।

    इसमें खास बात है कि अमरोहा जनपद में भी सीएचसीस्तर पर वित्तीय वर्ष में 1500 से अधिक सास-बहू के सम्मेलन होने थे। सम्मेलन करने के लिए एक परिवार से सास-बहू व पति को शामिल करना था। मगर हैरत की बात है कि सीएचसीस्तर पर कागजों में ही 1320 सम्मेलन करा दिए। जबकि मुश्किल से दो या तीन-तीन ही सम्मेलन कराकर खानापूर्ति कर ली गई।

    सम्मेलन के फोटो की जियो टैगिंग भी नहीं कराई गई है। जबकि सम्मेलन कराने में 21 लाख 12 हजार रुपये का खर्च भी दिखा दिया। हालांकि अभी सरकार से बजट नहीं मिला है और और बजट मिलने के बाद ही भुगतान करने की बात कही जा रही है।

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    एक चिकित्सक ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि हर साल सास-बहू सम्मेलन के नाम पर लाखों रुपये का बजट डकार जाते हैं। अगर इसमें सम्मेलन की जियो टैगिंग फोटो से मिलान कराया गया तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।

    सम्मेलन कराने का यह है नियम

    सास-बहू सम्मेलन कराने के लिए एक टैंट, माइक, स्टेज, बैनर स्टेनरी लगाई जाती है। सम्मेलन में सास-बहू और उसके पति को शामिल किया जाता है। जिसमें जलपान के साथ उनको पुरस्कार भी दिया जाता है।

    इसमें 100 रुपये आशा को दिए जाते हैं। इस प्रकार एक सम्मेलन कराने पर करीब 1600 रुपये का खर्च आता है। संबंधित जिम्मेदार अधिकारी सम्मेलन का फोटो लेकर जियो टैगिंग के बाद ग्रुप पर शेयर करता है।

    सम्मेलन कराने को लेकर यह बोले जिम्मेदार

    सास-बहू के सम्मेलन के बारे दैनिक जागरण की टीम ने जियो टैगिंग के फोटो दिखाने को कहा तो जिम्मेदारों ने तर्क दिया कि सीएचसी स्तर पर कराए गए थे। सम्मेलन में सास-बहू व उसके पति को शामिल किया गया था। जिसके माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया था। फोटो कराकर उनकी जियो टैगिंग कराई थी, लेकिन अब फोटो डिलीट हो गए होंगे।

     

    वित्तीय वर्ष में अगर सीएचसी स्तर पर 1320 सास-बहू के सम्मेलन धरातल पर नहीं कराए गए हैं, बल्कि कागजों में ही हुए तो जांच कराई जाएगी। उसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

    - डाॅ. रमाकांत सागर, सीएमओ


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