अमरोहा नगर पालिका की बढ़ी मुश्किलें: 12 करोड़ वसूली का टारगेट, 30 हजार संपत्तियां अभी भी टैक्स से बाहर
अमरोहा नगर पालिका का राजस्व वसूली लक्ष्य 4.46 करोड़ से बढ़कर 12 करोड़ रुपये सालाना हो गया है। जियो इंफॉर्मेटिक्स सर्वे न होने से 30 हजार संपत्तियां टैक्स के दायरे से बाहर हैं, जिससे लक्ष्य पूरा करना चुनौती बन गया है।

अमरोहा नगर पालिका
HighLights
अभी तक 43 हजार संपत्तियों से सालाना 4.46 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य था निर्धारित
जागरण संवाददाता, अमरोहा। नगर पालिका परिषद अमरोहा को शासन ने राजस्व वसूली का लक्ष्य 4.46 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये सालाना कर दिया है। शासन के इस फैसले से एक तरफ विकास कार्यों के लिए फंड बढ़ने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ पालिका प्रशासन के सामने इसे पूरा करने में बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है, क्योंकि अभी तक जीयो इंफार्मेटिक्स सर्वे ही शुरू नहीं हुआ है।
पालिका प्रशासन के रिकार्ड में अमरोहा नगर की 43 हजार आवासीय तथा अनावासीय संपत्तियां दर्ज है। संपत्तियों से अभी तक सालाना राजस्व वसूली का लक्ष्य 4.46 करोड़ रुपये निर्धारित था। मगर जलकर, ग्रहकर, कर करेत्तर को मिलाकर सभी मदों पालिका प्रशासन सात करोड़ रुपये की सालाना वसूली कर लेता था।
पिछले वर्ष भी रिकार्ड तोड़ सात करोड़ रुपये के राजस्व की वसूली की थी। सभी संपत्तियाें को आनलाइन कर अप्रैल माह 2025 से सर्किल रेट व क्षेत्रफल के हिसाब से नई टैक्स दरें लागू की गई है। नई टैक्स दरें लागू होने से सभी संपत्तियों से करीब दो लाख रुपये का राजस्व बढ़ने का अनुमान है।
नई दरों के मुताबिक अगर 24 मीटर चौड़े से अधिक मार्ग पर किसी का पक्का मकान है तो उस पर दो रुपये से 2.60 रुपये तक प्रति वर्ग मीटर का टैक्स निर्धारित किया है। 12 मीटर से 24 मीटर चौड़ी सड़क पर बने मकान मालिका पर न्यूनतम 1.50 रुपये से दो रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से टैक्स लगाया है।
अब शासन ने राजस्व वसूली का लक्ष्य बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है। जिससे पालिका प्रशासन के सामने लक्ष्य पूरा करने में चुनौती बनी हुई है, क्योंकि अभी तक जीयो इंफार्मेटिक्स सर्वे ही शुरू नहीं हुआ है। जिससे अधिकारी भी परेशान हैं।
जीयो इंफार्मेटिक्स सर्वे अधर में, राजस्व वसूली लक्ष्य कैसे होगा पूरा
कर अधीक्षक केशव प्रसाद ने बताया कि टैक्स वसूलने में पारदर्शिता लाने के लिए पिछले वर्ष शासनस्तर से सभी संपत्तियाें का नये सिरे से जीयो इंफार्मेटिक्स सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए शासनस्तर से कंपनी को भी नामित किया था।
पालिका को स्थानीय स्तर पर फर्म को टेंडर देकर नगर की संपत्तियों का जीयो इंफार्मेटिक्स सर्वे कराना था। जिससे जिन संपत्तियों पर अभी तक टैक्स नहीं लगा है या बहुत कम लगा हुआ है। वह भी टैक्स के दायरे में आ जाती।
लेकिन अभी तक स्थानीय स्तर पर ही किसी फर्म को टेंडर नहीं हुआ है। जिससे सर्वे नहीं होने पर करीब 30 हजार संपत्तियां अब भी टैक्स के दायरे से बाहर हैं। अगर सर्वे हो जाता तो पालिका का राजस्व भी दोगुना हो जाता है। जिससे 12 करोड़ रुपये का राजस्व भी वसूलने में आसानी हो जाती।
अधिकारी परेशान, विकास कार्य भी प्रभावित होने का डर
पालिका के अधिकारी भी लक्ष्य बढ़ने से परेशान हैं। राजस्व टीम पर वसूली का दबाव बढ़ गया है। यदि संपत्तियों का जीयो इंफामेटिक्स सर्वे कराकर राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के साथ विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
कर अधीक्षक केशव प्रसाद ने बताया कि राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं करने पर शासनस्तर से पालिका को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर भी असर पड़ेगा। इसलिए शहर के विकास के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने आमजन से भी अपील है कि जिनकी संपत्तियां अभी टैक्स में दर्ज नहीं हैं, वह स्वेच्छा से पालिका कार्यालय में आकर अपना पंजीकरण कराएं।
पालिका प्रशासन को राजस्व वसूली का लक्ष्य 4.46 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है। राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए शासनादेश के अनुसार सभी संपत्तियों का जीयो इंफार्मेटिक्स सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए आमजन का भी सहयोग लिया जाएगा।
- दिनेश कुमार यादव, पालिका ईओ
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