औरैया में भाभी की हत्या के दोषी देवर को आजीवन कारावास, पचास हजार का अर्थदंड
औरैया में नौ साल पुराने भाभी की हत्या के मामले में देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया, जिसमे ...और पढ़ें

HighLights
नौ साल पुराने भाभी हत्याकांड में देवर को सजा।
अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास व अर्थदंड दिया।
अर्थदंड की आधी राशि मृतका के बच्चों को मिलेगी।
जागरण संवाददाता, औरैया। थाना फफूंद क्षेत्र के अंतर्गत लगभग नौ साल पहले ग्राम मुड़ैना रामदत्त में ससुराल में युवती की फांसी से हुई मौत के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह ने देवर अनुरुद्ध उर्फ बबूल को हत्या का दोषी माना। उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। उस पर पचास हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद राजपूत ने बताया कि थाना फफूंद में वादी दीन दयाल ने रिपोर्ट लिखाई। इसमें लिखा कि उसने अपनी पुत्री राविन्द्री की शादी लगभग आठ साल पहले ग्राम मुड़ैना रामदत्त निवासी धर्मेन्द्र के साथ की थी। उसकी पुत्री के तीन बच्चे हैं। दामाद धर्मेन्द्र व बबलू दो भाई हैं।
पति धर्मेन्द्र दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। घर पर मेरी पुत्री राविन्द्री, देवर बबलू व ससुर विन्द किशोर रहते हैं। सात जनवरी 2017 को रात में मेरी पुत्री के देवर बबलू द्वारा मोबाइल पर सूचना दी गई कि भाभी राविन्द्री ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।
यह सुनकर वादी अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ पुत्री राविन्द्री की ससुराल ग्राम मुरैना रामदत्त पहुंचे तो देखा कि पुत्री का शव घर के अन्दर छप्पर के नीचे दरवाजे के सामने रखा है। वादी ने पुलिस को सूचना दी व रिपोर्ट लिखाई कि देवर बबलू व ससुर विन्द किशोर मेरी पुत्री का उत्पीड़न व परेशान करते रहते थे। इसी कारण से तंग आकर मेरी पुत्री ने फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली है।
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पुलिस ने देवर व ससुर के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित का मुकदमा पंजीकृत किया। विवेचना में ससुर की नामजदगी गलत पाई गई। केवल देवर के खिलाफ मुकदमे का विचारण अपर जिला न्यायाधीश की न्यायालय में हुआ। शुक्रवार को निर्णय सुनाया गया।
इसके पूर्व अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविन्द राजपूत ने बहस की कि दिवंगत की पुत्री इस केश की चश्मदीद गवाह है। जिसने देवर द्वारा मारपीट कर हत्या की बात कोर्ट में कही है। अत: दोषी को कठोर दंड दिया जाए।
बचाव पक्ष ने स्वयं फांसी लगाने की बात कही। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह ने इसे हत्या का मामला माना। देवर अनुरुद्ध उर्फ बबूल को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर पचास हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अधिवक्ता महावीर शर्मा के अनुसार न्यायालय ने ने अधिराेपित अर्थदंड की आधी धनराशि मृतका राविन्द्री के बच्चों को प्रदान करने का आदेश दिया। दोषी को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।