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Auraiya Double Murder: एक-दूसरे की परछाई थे कमलेश पाठक और मंजुल चौबे, फिर बने सियासी प्रतिद्वंद्वी, दोस्ती दुश्मनी में बदली

Published: Thu, 20 Aug 2026 12:34 AM (IST)

औरैया के दोहरे हत्याकांड में पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई ...और पढ़ें

मंजुल चौबे की फाइल फोटो व पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक।

मंजुल चौबे की फाइल फोटो व पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक।

HighLights

  1. पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास जमीन विवाद ने बढ़ाई रंजिश, 15 मार्च 2020 को दिनदहाड़े गोलीबारी में हुई थी दोहरी हत्या

  2. वर्ष 2006 के नगर पालिका चुनाव से दोनों के बीच मतभेद की शुरुआत, बाद में भाजपा और सपा के अलग-अलग खेमों में दिखे

  3. मंजुल चौबे को राजनीति में आगे बढ़ाने में कमलेश पाठक ने की थी मदद, समय के साथ दोनों के रास्ते हुए अलग

जागरण संवाददाता, औरैया। औरैया में वर्ष 2020 में हुए दोहरे हत्याकांड व संबंधित मामलों में पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक व उनके दो सगे भाइयों समेत 10 आरोपितों को दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास की सजा हुई। 15 मार्च 2020 को शहर के मध्य मुहल्ला नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में दिन-दहाड़े हुई गोलीबारी में अधिवक्ता मंजुल चौबे व उसकी चचेरी बहन सुधा की मौत हो गई थी। कभी एक-दूसरे के बेहद करीबी रहे कमलेश पाठक और अधिवक्ता मंजुल चौबे के रिश्ते ने ऐसा मोड़ लिया कि दोस्ती दुश्मनी में बदल गई।

कभी मंजुल को कमलेश पाठक की ‘परछाई’ तक कहा जाता था और राजनीतिक सफर में आगे बढ़ाने में कमलेश ने उनका साथ दिया था। समय के साथ मंजुल की अपनी राजनीतिक पहचान बनी तो दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। राजनीतिक मतभेद के बीच पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास जमीन का विवाद सामने आया और पुरानी दोस्ती गहरी रंजिश में बदल गई।

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फैसला आने के बाद पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय से बाहर आते पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक। जागरण

मंजुल चौबे छात्र राजनीति से जुड़े और तिलक महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष भी चुने गए। उस समय कमलेश पाठक ने उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने में सहयोग किया था। धीरे-धीरे मंजुल की अपनी राजनीतिक पहचान बनने लगी। वर्ष 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान दोनों के बीच मतभेद सामने आने लगे। बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब होते गए, जबकि कमलेश पाठक सपा के साथ बने रहे।

राजनीतिक मतभेद के बीच पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास जमीन का विवाद सामने आया। इससे दोनों के बीच रंजिश और बढ़ गई। इसी जमीन विवाद में 15 मार्च 2020 को शहर के मध्य मोहल्ला नारायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में दिनदहाड़े गोलीबारी हुई थी। इसमें अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

Auraiya Double Murder

रामू पाठक व संतोष पाठक, रविंद्र चौबे, शिवम अवस्थी, कुलदीप अवस्थी उर्फ पप्पू निवासी मुहल्ला विधीचंद्र, विकल्प अवस्थी उर्फ चैनू, राजेश शुक्ला भगवताचार्य मुहल्ला ब्रह्मनगर, अवनीश प्रताप सिंह निवासी गुमानपुर थाना रिजौर जनपद एटा, आशीष दुबे निवासी होमगंज। पुलिस

एक बीघा जमीन के विवाद ने बढ़ाई थी दोनों परिवारों में रंजिश

पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे व्यक्तिगत और राजनीतिक रंजिश में बदल गया। पुलिस व कुछ लोगों के अनुसार इसी जमीन को लेकर कमलेश पाठक और अधिवक्ता मंजुल चौबे के बीच मतभेद बढ़ते चले गए थे। कभी दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों में साथ दिखाई देते थे, लेकिन समय के साथ दोनों के रास्ते अलग हो गए। बताया जाता है कि कमलेश पाठक मंदिर के पास स्थित जमीन पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे, जबकि मंजुल चौबे इसका विरोध कर रहे थे। जमीन को लेकर शुरू हुई तनातनी के बाद इलाके के लोगों की नजर भी इस विवाद पर रहने लगी थी।

घटना के दिन कमलेश पाठक और मंजुल के पिता में हुई थी कहासुनी

घटना वाले दिन कमलेश पाठक मंदिर परिसर के पास जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे थे। इसी दौरान मंजुल के पिता वहां पहुंचे और दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर दोनों परिवारों के लोग मौके पर पहुंच गए। कमलेश के भाई संतोष और रामू भी वहां पहुंचे। आरोप है कि विवाद बढ़ने के दौरान मारपीट शुरू हो गई और इसी बीच फायरिंग हो गई। गोली लगने से अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा जमीन पर गिर पड़े। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मामले में कमलेश पाठक, उनके भाइयों समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

कमलेश पाठक की 36.15 करोड़ रुपये की संपत्ति की गई थी जब्त

दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस और प्रशासन ने आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। प्रशासन ने कमलेश पाठक समेत अन्य आरोपितों की संपत्तियों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया था। कमलेश पाठक की करीब 36.15 करोड़, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ और रामू पाठक की करीब 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी। छह साल से लंबित इस मामले में 10 आरोपितों को उम्रकैद मिलने के बाद अब पीड़ित परिवार के लोगों ने न्याय मिलने की बात कही है। वहीं, मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।

कम उम्र में विधायक बनने से लेकर एमएलसी तक का सफर

कमलेश पाठक औरैया की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली नाम रहे। महज 28 वर्ष की उम्र में वह सपा से विधायक बने थे। इसके बाद उन्होंने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1990 में वह विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बने। वर्ष 2002 में दिबियापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर दोबारा विधायक बने। वर्ष 2007 में उन्होंने दिबियापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। वर्ष 2012 में सिकंदरा विधानसभा सीट से भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद 2013 में सपा सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया। वर्ष 2015 में सपा ने उन्हें दोबारा एमएलसी बनाया।

कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाए गए आरोपित, फैसले के बाद मायूस दिखे समर्थक

दोहरे हत्याकांड, आर्म्स एक्ट समेत तीन अलग-अलग मुकदमों की सुनवाई कर रही एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार दोपहर दो बजे के बाद फैसला सुनाया। दोष सिद्ध होने के बाद आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। कमलेश पाठक को आगरा जेल, तो अन्य आरोपितों को अलग-अलग जेलों से पुलिस की कड़ी सुरक्षा में जिला एवं सत्र न्यायालय लाया गया था। पहले से तय तारीख को ध्यान में रखते हुए कमलेश व अन्य आरोपितों के शुभचिंतक भी पहुंचे थे। हालांकि, न्यायालय के बाहर और अंदर पुलिस का सख्त पहरा रहा। सदर कोतवाली समेत अन्य थानों का फोर्स लगाया गया था। सीओ बिधूना पी. पुनीत मिश्र ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ पुलिसकर्मियों के तैनाती स्थलों का मुआयना किया। लोगों की भीड़ देखने को मिली। फैसला आने के बाद आरोपितों को जेल ले जाते समय भीड़ को हटाया गया।

चार अगस्त को सजा पर फैसला सुरक्षित होने के बाद बुधवार को कोर्ट ने सुनाया निर्णय

चार अगस्त को न्यायालय द्वारा आरोपितों को होने वाली सजा के फैसले को सुरक्षित कर दिया था। सुनवाई पूरी होने के बाद हर किसी को सिर्फ फैसले की घड़ी का इंतजार था। यह इंतजार बुधवार दोपहर समाप्त हुआ। राजनीतिक गलियारे में भी कोर्ट का फैसला सुनने की उत्सुकता रही। पुलिस वाहनों से लाए गए आरोपितों को सुरक्षा घेरे में न्यायालय के अंदर ले जाया गया। फैसले को लेकर कमलेश पाठक के शुभचिंतकों और समर्थकों में सुबह से ही उत्सुकता बनी रही। न्यायालय का फैसला आने के बाद हालांकि उनके बीच मायूसी देखने को मिली। 10 आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद स्वजन के चेहरे उतरे दिखे।

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मुहल्ला नरायनपुर स्थित मंजुल चौबे के आवास पर बैठे उनके स्वजन। जागरण

पीड़ित पक्ष ने कहा- लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला

पीड़ित पक्ष ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है। साथ ही, न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही न्याय मिलने में देर हुई, लेकिन उन्हें न्यायालय पर भरोसा था। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आरोपित फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख करेंगे। यदि अपील की जाती है तो मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

हत्या के मामले में दोषियों को सजा

अधिवक्ता मंजुल चौबे व उसकी बहन सुधा की हत्या के मामले में दोषसिद्ध पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, पूर्व ब्लाक प्रमुख संतोष पाठक, कुलदीप अवस्थी उर्फ पप्पू, विकल्प उर्फ चैनू अवस्थी, राजेश शुक्ला भगवताचार्य, अवनीश प्रताप सिंह, आशीष दुबे, शिवम अवस्थी व रविन्द्र उर्फ लला चौबे को आजीवन कारावास व प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।

प्राणघातक हमले में दोषियों को सजा

प्राणघातक हमले के मामले में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, पूर्व ब्लाक प्रमुख संतोष पाठक, कुलदीप अवस्थी उर्फ पप्पू, विकल्प उर्फ चैनू अवस्थी, राजेश शुक्ला भगवताचार्य, अवनीश प्रताप सिंह, आशीष दुबे, शिवम अवस्थी व रविन्द्र उर्फ लला चौबे को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। प्रत्येक दोषी पर 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।

आयुध अधिनियम में मिली सजा

पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, संतोष पाठक, विकल्प उर्फ चैनू अवस्थी को सात-सात वर्ष कारावास व 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। रामू पाठक, राजेश शुक्ला को तीन-तीन वर्ष कारावास व एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। न्यायालय ने आदेशित किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित होगी।

न्यायालय के फैसले से संतुष्ट वादी पक्ष, बोले- सच परेशान हो सकता है, हारता नहीं

जागरण संवाददाता, औरैया: दोहरे हत्याकांड में बुधवार को न्यायालय के निर्णय से वादी पक्ष संतुष्ट दिखा। दिवंगत अधिवक्ता मंजुल चौबे के पिता शिव कुमार चौबे, मां सरला, बहन रश्मि, पत्नी आरती ने कहा कि सच परेशान हो सकता है, पर कभी हारता नहीं। ईश्वर के यहां देर हो सकती, लेकिन अंधेर नहीं है। न्यायालय के फैसले से यह सिद्ध हो गया। वादी आशीष चौबे ने कहा कि निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाया। न्यायपालिका पर पूर्ण भरोसा था कि भाई-बहन के हत्यारों को सजा जरूर मिलेगी। फैसले के समय अपने बेटे व भतीजी को गंवा चुके शिव कुमार उर्फ मुनुआ चौबे कचहरी में मौजूद रहे।

अभियोजन के 32 गवाह बचाव पक्ष के गवाहों पर पड़े भारी

औरैया: इस दोहरे हत्याकांड में अभियोजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हृदयनारायण पाण्डेय, अंकुर अवस्थी, सौरभ पाठक, जिला शासकीय अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चन्द्र भूषण तिवारी ने पैरवी की। विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से 32 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। जो बचाव पक्ष के 39 सफाई साक्ष्य के गवाहों पर भारी पड़े। अधिवक्ता सौरभ पाठक ने बताया कि निचली अदालत से उच्च न्यायालय तक अभियोजन की ओर से सशक्त पैरवी की। न्यायालय का निर्णय उम्मीद के मुताबिक हुआ। इस निर्णय से जनता में न्याय के प्रति विश्वास बढ़ेगा।

खाई थी कसम, हत्यारों को सजा दिलाकर निकलवाएंगे पैर में लगी गोली

औरैया: दोहरे हत्याकांड में मृतक अधिवक्ता मंजुल चौबे के बड़े भाई संजय चौबे के पैर में भी गोली लगी थी, जिसे उन्होंने आज तक नहीं निकलवाया है। उनका कहना है कि उन्होंने कसम खाई थी कि दर्द सहन करेंगे और भाई व बहन के हत्यारों को सजा दिलाने के बाद ही पैर में लगी गोली निकलवाएंगे। न्यायालय के निर्णय से संतुष्ट संजय के चेहरे पर खुशी है, लेकिन एक दर्द भी है। मंजुल की छह वर्ष की बेटी आराध्या हत्याकांड के समय महज तीन माह की थी। अब वह गोद में बैठकर पूछती है, ‘ताऊ, पापा कब वापस आएंगे?’ संजय कहते हैं कि अब तो फैसला भी आ गया।