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    औरैया हत्याकांड: साढ़े सात साल बाद चार दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा, 50-50 हजार रुपये अर्थदंड

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 05:36 PM (IST)

    न्यायालय ने औरैया के अयाना थाना क्षेत्र के हसुलिया गांव में साढ़े सात साल पुराने युवक मोहन उर्फ प्रिंस हत्याकांड में फैसला सुनाया। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, औरैया। थाना अयाना क्षेत्र के गांव हसुलिया में लगभग साढ़े सात वर्ष पहले युवक की हुई हत्या के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया।

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार ने 20 वर्षीय युवक मोहन उर्फ प्रिंस की हत्या करने के चारों दोषी राहुल, पप्पू गुप्ता, सोनू उर्फ छंगे व बृजेश को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। सभी पर 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।

    अभियोजन की ओर से उक्त मामले की पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद राजपूत के अनुसार थाना अयाना में वादी माधौ सिंह उर्फ पवन निवासी हसुलिया ने मामला पंजीकृत कराया।

    वादी ने लिखा कि 28 दिसंबर 2017 की शाम 5.30 बजे वह अपने भाई मोहन उर्फ प्रिंस, मां गुड्डी देवी साथ साथ अपने खेतों में काम करके घर वापस आ रहे थे। तभी रास्ते में गांव के पप्पू गुप्ता पुत्र ओम प्रकाश के मकान के सामने सड़क पर पहुंचे।

    तभी पप्पू ने अपने मकान से उसके भाई को गाली देते हुए रोका और बोला कि तू मेरी पत्नी की बदनामी करता है। आज मैं तुझे देखता हूं। तभी पप्पू हाथ में हसिया, सोनू उर्फ छंगे चाकू, बृजेश कुल्हाड़ी व राहुल लाठी लेकर 20 वर्षीय भाई मोहन उर्फ प्रिंस पुत्र स्व. सत्येंद्र सिंह को मारने लगे, जिसकी चीख पुकार सुनकर साथ में आ रहे मेरे दादा व अन्य ने बीच बचाव किया।

    तब तक मोहन उर्फ प्रिंस की मृत्यु हो चुकी थी। इस तहरीर पर थाना अयाना में रिपोर्ट पंजीकृत हुई। पुलिस ने विवेचना कर चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले का विचारण अपर सत्र न्यायालय (द्वितीय) कोर्ट में हुआ। शुक्रवार को निर्णय सुनाया गया।

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    इसके पूर्व अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद राजपूत ने युवक की नृशंस हत्या करने वालों को कठोर दंड देने की बहस की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपितों को निर्दोष बताया। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार ने दोषी राहुल उर्फ राजकपुर (32), पप्पू गुप्ता (56), सोनू उर्फ छंगे (35), बृजेश (46) को हत्या का दोषी माना।

    सोनू उर्फ छंगे के पास से तमंचा मिला था। इसीलिए उसे आयुध अधिनियम धारा 25 का भी दोषी माना गया। न्यायालय ने चारों को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया तथा सभी पर 50-50 हजार अर्थदंड भी लगाया।

    सोनू पर 10 हजार रुपये अतिरिक्त अर्थदंड भी आयुष अधिनियम में लगा। न्यायालय ने अर्थदंड की आधी धनराशि मृतक के वारिसान को अदा करने का आदेश दिया। दोषियों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।