रामकथा पार्क में विदेशी कलाकारों ने पेश की रामकथा, लोक कला और नृत्यों से सजा अयोध्या; देखें रामनगरी की सुंदर तस्वीरें
अयोध्या के दीपोत्सव में रामकथा पार्क में देशी-विदेशी कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका सहित विभिन्न ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, अयोध्या। दीपोत्सव की सांस्कृतिक संध्या ने रामकथा पार्क के मंच पर रामायण की वैश्विक थाती प्रतिष्ठित की। अलग-अलग राज्यों के साथ श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान विविध स्वरूपों में रामकथा जीवंत हुई।

इसके साथ ही कलाकार लोकनृत्य, संगीत और शास्त्रीय गायन करते रहे। असम के गुवाहाटी की कीर्तन फाउंडेशन ने 'रघुनन्दना' और 'राम विजय' तथा जम्मू-कश्मीर के ब्रज कला केंद्र के कलाकारों ने डोगरी भाषा में रामलीला का मंचन किया।
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केरल के कलामंडलम लीलाम्मा मेमोरियल कल्चरल ट्रस्ट ने 'रामायण-सांस्कृतिक यात्रा' की प्रस्तुति दी। उत्तराखंड के विनीत बिष्ट और लक्ष्मी भंडार की ओर से पारंपरिक रामलीला विशिष्ट रहा। बंगाल के बंशी नाथ ढकुआ ने भी रामलीला की प्रस्तुति दी।
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श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका के कलाकारों के दलों ने रामलीला के जरिए अपने देशों में प्रचलित रामायण की सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर उतारा। विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि रामकथा अलग-अलग देशों और समाजों की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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कार्यक्रम में लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से कथक पर आधारित रामायण प्रदर्शित हुई। कलाकारों ने कथक की पारंपरिक भाव-भंगिमाओं और नृत्य शैली के जरिए भगवान की जीवन यात्रा जीवंत हुई। शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत रामकथा ने सांस्कृतिक संध्या में भारतीय कला परंपरा का विशिष्ट रंग जोड़ा।
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रामकथा पार्क में हुई इस सांस्कृतिक संध्या ने दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया।
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असम से केरल, जम्मू-कश्मीर से बंगाल और उत्तराखंड से लेकर विदेशों तक की प्रस्तुतियों ने रामायण की व्यापक सांस्कृतिक पहुंच को रेखांकित किया। कार्यक्रम में विभिन्न भाषाओं, लोककलाओं और नाट्य शैलियों के जरिए एक ही रामकथा के अनेक रूप देखने को मिले।