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गैर विद्युत निगम ने 18 साल तक दबाए रखी हादसे की रिपोर्ट, न्यायालय ने दिया भुगतान का आदेश

Published: Sat, 05 Sep 2026 05:24 PM (IST)

स्थायी लोक अदालत ने अयोध्या में 2006 के एक करंट लगने से हुई मौत के मामले में विद्युत निगम को ...और पढ़ें

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HighLights

  1. विद्युत निगम को 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश।

  2. 18 साल पुरानी जांच रिपोर्ट को फर्जी बताया था निगम ने।

  3. न्यायालय ने संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। करंट लगने से युवक की मौत के लगभग 20 वर्ष पुराने मामले में स्थायी लोक अदालत ने विद्युत निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए मृतक की पत्नी को बड़ी राहत दी है।

पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार तिवारी व न्यायिक सदस्य राजेश कुमार शुक्ल व अजीत सिंह ने विद्युत निगम को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति सात प्रतिशत ब्याज के साथ 10 हजार रुपये वाद व्यय और 20 हजार रुपये मानसिक कष्ट के लिए देने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने उस समय कड़ी टिप्पणी की, जब निगम के अधिकारी ने विद्युत सुरक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश शासन की जांच रिपोर्ट को ही फर्जी बता दिया। इसे अत्यंत चिंताजनक, लापरवाहीपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना मानते हुए न्यायालय ने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं और 90 दिनों में जवाब भी मांगा है।

परिवादी कमलेश के अधिवक्ता श्याम अग्रवाल के अनुसार मामला मिल्कीपुर क्षेत्र के ग्राम मजनाई निवासी पवन कुमार यादव की मौत से जुड़ा है। 29 अगस्त 2006 को पवन कुमार यादव बस से कचहरी जा रहे थे।

रास्ते में पलिया जगमोहन पूरे बहिरा के पास नीचे लटक रहा विद्युत तार बस से संपर्क में आ गया। बस में करंट उतरने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बस से बाहर निकलते समय पवन कुमार यादव करंट की चपेट में आ गए और अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

2007 की जांच रिपोर्ट पर वर्षों तक नहीं हुई कार्रवाई

अधिवक्ता श्याम अग्रवाल ने बताया कि मृतक की पत्नी की ओर से विद्युत सुरक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश शासन की सात मई 2007 की जांच रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में प्रभावित परिवार को क्षतिपूर्ति दिए जाने के संबंध में विद्युत निगम से संपर्क करने का निर्देश दिया गया था।

राहत न मिलने पर मृतक की पत्नी ने वर्ष 2018 में न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया। न्यायालय ने विद्युत निगम और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम से क्षतिपूर्ति की अदायगी के विषय में जानकारी मांगी तो निगम ने विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच रिपोर्ट को ही फर्जी करार दे दिया गया।